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चिन्हित व जघन्य अपराधों की गहनता से हो जांच, अपराधियों को मिले सजा, गवाहों की भी सुरक्षा रहे सुनिश्चित : उपायुक्त अनीश यादव

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आईरा न्यूज़ नेटवर्क करनाल से सुमरिन योगी

चिन्हित अपराधों की समीक्षा के लिए उपायुक्त ने की मासिक बैठक, पुलिस अधीक्षक गंगा राम पुनिया और जिला न्यायवादी डॉ. पंकज, उप जिला न्यायवादी बृज मोहन व जिला जेल अधीक्षक अमित कुमार भी रहे मौजूद।

करनाल । उपायुक्त एवं चिन्हित अपराधों की जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी के चेयरमैन अनीश यादव ने बुधवार को लघु सचिवालय के सभागार में संबंधित अधिकारियों की बैठक ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चिन्हित व जघन्य अपराधों में शामिल अपराधियों को हर हाल में सजा मिलनी चाहिए। इसके लिए अभियोजन पक्ष और जांच अधिकारी की ओर से कोई कमी न रहे तथा ऐसे मामलो में गवाहों की सुरक्षा भी सुनिश्चित रहनी चाहिए। बैठक में जिला पुलिस अधीक्षक गंगा राम पुनिया के अतिरिक्त, जिला न्यायवादी डॉ. पंकज, सहायक जिला न्यायवादी बृज मोहन व जिला जेल अधीक्षक अमित कुमार मौजूद रहे। उपायुक्त ने कहा कि पब्लिक प्रोसिक्यूटर जिला में चिन्हित अपराधों की अच्छे तरीके से पैरवी करें, किसी भी सूरत में दोषी बख्शा न जाए। जिला में चिन्हित अपराधों को लेकर हर मास बैठक कर मंथन किया जाता है, ताकि संगीन अपराधों में शामिल अपराधियों का हर हाल में सजा दिलवाई जा सके। उन्होंने आज की बैठक में आपराधिक मामलों का स्टेटस जाना और जिन मुकदमों में अपराधी बरी हुए, उनको एग्जामिन किया।
उपायुक्त ने चिहिन्त व जघन्य अपराधों में, पुलिस अधीक्षक और जिला न्यायवादी को अधिक से अधिक वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के साथ-साथ पीडि़त व चश्मदीद गवाहों की गवाही जल्द से जल्द करवाने के निर्देश दिए। गम्भीर अपराधों के मामले में उन्होंने जिला पुलिस अधीक्षक से कहा कि ऐसे केसों की अच्छे से सुपरवीजन बनी रहनी चाहिए। जिला न्यायवादी को गम्भीर अपराधों में अदालती मामलों की मॉनिटरिंग करने को कहा। उन्होंने चिहिन्त अपराधों के मामलों पर चर्चा की। मीटिंग में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति पर अत्याचार रोकने के लिए गठित एक्ट 1989, महिला एवं कमजोर वर्गों के साथ किए गए अत्याचार, पोक्सो एक्ट तथा भ्र्ष्टाचार से सम्बंधित मामलों की मॉनिटरिंग को लेकर भी चर्चा की गई। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक गंगाराम पुनिया ने भी कहा कि जांच अधिकारी द्वारा हर तथ्यों की बारिकी से जांच की जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन द्वारा अपराधों पर रोक लगाने के लिए की असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखे हुए है फिर भी समाज के लोगों का सहयोग जरूरी है, वे पुलिस प्रशासन को किसी भी घटना की सूचना देने में संकोच न करें। पुलिस प्रशासन लोगों को बेहतरीन सुरक्षा प्रदान करने व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कटिबद्ध है।
जिला न्यायवादी डॉ. पंकज ने उपायुक्त को बताया कि सभी मामलो की उचित ढंग से पैरवी की जाती है। गवाहों को कहा जाता है कि वे निडरता से ब्यान दें, फिर भी कई मामले न्यायालय में जाकर प्रतिरोधी हो जाते हैं। उन्होंने न्यायालय में पैंडिंग व निपट गए मामलों की अक्तूबर 2022 तक की समेकित डायरी रिपोर्ट भी उपायुक्त को प्रस्तुत की। क्या है चिन्हित अपराध :
चिन्हित अपराध को लेकर हर जिला में गठित एक कमेटी के माध्यम से सरकार को रिपोर्ट जाती है। ऐसे अपराध जिनसे जनता के दिलो-दिमाग में यह जानने की जिज्ञासा होती है कि इसमें अपराध करने वाले को सजा मिलेगी या नहीं और केस का फैसला होने के बाद उसके कारणों को जानने की भी जिज्ञासा रहती है। इस बारे सरकार का मानना है कि ऐसे केसों में अपराधियों का सजा जरूर मिलनी चाहिए और बेगुनाह केस से बरी होने चाहिएं, लेकिन कई बार ऐसा हो जाता है कि अपराधी केस की अच्छी तरह पैरवी न होने से बच निकलते हैं या बरी हो जाते हैं। ऐसे केसों पर मंथन करने के लिए हर माह जिला स्तर पर मीटिंग होती है।

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