मानवाधिकार आयोग में पहुंचा करंट तार मामला: बंदर की मौत, झुंड के हमले और प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
आईरा न्यूज़ नेटवर्क
नूरपुर-संवाददाता – विकास सिंह की रिपोर्ट
मानवाधिकार आयोग में पहुंचा करंट तार मामला: बंदर की मौत, झुंड के हमले और प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
अवैध करंट तार, वन्यजीव की मौत और पुलिस की निष्क्रियता बनी जांच का विषय
नूरपुर (बिजनौर)।
थाना नूरपुर क्षेत्र के ग्राम मोरना में अवैध करंट युक्त तारों से जुड़ा मामला अब उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने शिकायत प्राप्त कर इसे डायरी संख्या 2785/IN/2026 के रूप में दर्ज कर लिया है, जिससे पूरे प्रकरण ने गंभीर रूप ले लिया है।
करंट से बंदर की मौत, फिर झुंड का हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव में एक मकान की दीवार के पास अवैध रूप से करंट युक्त नंगे तार लगाए गए थे। इन तारों की चपेट में आकर एक बंदर की मौत हो गई।
इसके बाद आक्रोशित बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया, जिसमें एक व्यक्ति घायल हो गया।
लंबे समय से बना हुआ था खतरा
ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त तार काफी समय से लगे हुए हैं और पहले भी कई पशु-पक्षियों की करंट लगने से मौत हो चुकी है।
यहां तक कि बच्चों को भी करंट लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल है।
बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
पीड़ित पक्ष द्वारा थाना नूरपुर, IGRS पोर्टल, तहसील समाधान दिवस सहित उच्च अधिकारियों को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
आरोप है कि पुलिस जांच में मामले को “कार्यवाही योग्य नहीं” बताकर समाप्त कर दिया गया।
मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
शिकायतकर्ता द्वारा मामला मानवाधिकार आयोग में उठाए जाने के बाद आयोग ने इसे संज्ञान में लेते हुए रजिस्टर कर लिया है।
अब इस मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
🟢 Wildlife Protection Act के तहत गंभीर मामला
विशेषज्ञों का कहना है कि बंदर एक संरक्षित वन्यजीव है और करंट से उसकी मृत्यु होना Wildlife Protection Act, 1972 के तहत दंडनीय अपराध है।
ऐसे में दोषी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
🗣️ ग्रामीणों में रोष, सुरक्षा की मांग
पीड़ित ने प्रशासन से अवैध करंट युक्त तारों को तत्काल हटाने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि
बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था?
(आईरा न्यूज़ नेटवर्क)



























