तफसील मलिक: पत्रकारिता के ‘मल्टीपर्पज इंजन’ या संगठन की जान?
तफसील मलिक: पत्रकारिता के ‘मल्टीपर्पज इंजन’ या संगठन की जान?
स्योहारा। क्षेत्र में इन दिनों यदि किसी पत्रकार से पूछा जाए कि आजाद प्रेस क्लब और आईरा संगठन की मजबूती का राज क्या है, तो अधिकांश लोग बिना ज्यादा सोच-विचार के एक ही नाम लेते हैं—तफसील मलिक। कुछ लोग उन्हें संगठन का मजबूत स्तंभ बताते हैं, तो कुछ मजाकिया अंदाज में कहते हैं कि “जहां पत्रकारों की बैठक हो, वहां तफसील मलिक पहले से मौजूद मिलते हैं।”
पत्रकारिता, समाजसेवा और संगठन निर्माण के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता, लेकिन तफसील मलिक ने इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है। हालत यह है कि संगठन की किसी गतिविधि का जिक्र हो और उसमें उनका नाम न आए, तो लोगों को खबर अधूरी लगने लगती है।

मुरादाबाद मार्ग पर उनके द्वारा अपने निजी संसाधनों से निर्मित भव्य कार्यालय आज पत्रकारों के लिए किसी ‘मिनी संसद’ से कम नहीं माना जाता। यहां कभी पत्रकार हितों पर चर्चा होती है, कभी संगठन विस्तार पर रणनीति बनती है और कभी चाय के प्यालों के साथ पत्रकारिता के भविष्य पर गंभीर विमर्श। कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि यदि स्योहारा में पत्रकारों का कोई स्थायी पता पूछा जाए, तो सीधे इसी कार्यालय का नाम लिया जा सकता है।
आजाद प्रेस क्लब और आईरा संगठन के विस्तार में उनकी सक्रियता का असर साफ दिखाई दे रहा है। नए पत्रकार संगठन से जुड़ रहे हैं, पुरानों का उत्साह बढ़ रहा है और बैठकों में भागीदारी भी लगातार बढ़ती जा रही है। क्षेत्र के कई पत्रकार हंसते हुए कहते हैं कि “तफसील मलिक संगठन के ऐसे इंजन हैं, जो बिना रुके लगातार चलते रहते हैं और बाकी डिब्बों को भी साथ लेकर आगे बढ़ते हैं।”

हालांकि, उनके प्रशंसकों का मानना है कि यह सब केवल सक्रियता का परिणाम नहीं, बल्कि पत्रकार हितों के प्रति उनकी गंभीर सोच और समर्पण का भी प्रमाण है। उन्होंने हमेशा पत्रकारों की एकता को प्राथमिकता दी है और संगठन को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर रखने का प्रयास किया है।
क्षेत्र के पत्रकारों और सामाजिक लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह संगठनात्मक गतिविधियां आगे बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में आजाद प्रेस क्लब और आईरा क्षेत्र में पत्रकारों की सबसे प्रभावशाली आवाज के रूप में और अधिक मजबूत होकर उभरेंगे। फिलहाल इतना तो तय है कि स्योहारा की पत्रकारिता में तफसील मलिक का नाम चर्चा का विषय बना हुआ है—और यह चर्चा फिलहाल थमती हुई नजर नहीं आ रही।


















