उत्तराखंड

चपरासी को प्रधानाध्यापक बनाना- बनी मजबूरी, शिक्षा विभाग पर उठे सवाल

WhatsApp Image 2025-09-22 at 11.03.20
previous arrow
next arrow

पिथौरागढ़ / उत्तराखंड (रिज़वान अहसन ),,,,पिथौरागढ़ जनपद से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां मुनस्यारी क्षेत्र के राजकीय इंटर कॉलेज खतेड़ा में चतुर्थ श्रेणी कर्मी (चपरासी) को विद्यालय के प्रधानाचार्य का प्रभार सौंप दिया गया है। नियमों के खेल में हुए इस निर्णय से शिक्षा विभाग स्वयं उलझ गया है। कारण यह है कि विद्यालय के स्थाई शिक्षक आंदोलनरत होने के कारण प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने से पीछे हट गये हैं, जिसके बाद नियमों के अनुसार स्थाई कर्मी चपरासी राजू गिरी को प्रभारी प्रधानाचार्य बना दिया गया।
मुनस्यारी स्थित जीआईसी खतेड़ा में वर्तमान में एक एलटी प्रवक्ता, एक स्थाई शिक्षक, पांच अतिथि शिक्षक और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी तैनात हैं। प्रदेशभर में शिक्षक आंदोलन के अंतर्गत शिक्षकों ने पठन-पाठन के अलावा अन्य प्रशासनिक कार्य न करने का निर्णय लिया हुआ है। इसी क्रम में एलटी प्रवक्ता छोटे लाल ने प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया और दूसरे शिक्षक ने भी जिम्मेदारी संभालने से इनकार कर दिया। ऐसे में विद्यालय का प्रभार नियमानुसार चपरासी राजू गिरी को सौंप दिया गया।
विभागीय नियमों के अनुसार विद्यालय का प्रभार केवल किसी स्थाई कर्मी को ही दिया जा सकता है। जब दोनों स्थाई शिक्षकों ने जिम्मेदारी नहीं ली, तब एकमात्र विकल्प चतुर्थ श्रेणी कर्मी राजू गिरी रह गये। अब स्थिति यह है कि पांच अतिथि शिक्षक भी उनके आदेशों के अनुसार कार्य कर रहे हैं। इस कारण चपरासी की जिम्मेदारी केवल घंटी बजाने तक सीमित न रहकर अब विद्यालय प्रशासन और निर्णयों तक विस्तारित हो गई है। इस घटना से शिक्षा विभाग स्वयं असमंजस में है। मुनस्यारी के खंड शिक्षा अधिकारी दिंगबर आर्य ने शिक्षक संघ को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि आंदोलन के कारण शिक्षक प्रशासनिक दायित्वों से बच रहे हैं। उनका कहना था कि यदि प्रभारी पद किसी को सौंपना था, तो विभाग को पहले अवगत कराना आवश्यक था। इस विषय में जल्द निर्णय लेकर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
चपरासी को विद्यालय का प्रभारी बनाए जाने का यह मामला शिक्षा व्यवस्था और उसके प्रबंधन पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करता है। विद्यालयों में प्रशासनिक जिम्मेदारी शिक्षकों द्वारा न उठाना और विभागीय नियमों की मजबूरी में चतुर्थ श्रेणी कर्मी को प्रभार देना, दोनों ही शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। अब देखना होगा कि विभाग इस स्थिति का समाधान किस प्रकार करता है और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने इसके लिए कौन-से ठोस कदम उठाये जाते हैं।

RIZWAN AHSAN

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
close