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जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने मत्स्य अधिकारी को निर्देश दिए कि जिले को मत्स्य क्षेत्र में पूरी तहर आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य करें

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जनपद बिजनौर आईरा न्यूज़ नेटवर्क जिला प्रभारी राजेश सिंघल

जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने मत्स्य अधिकारी को निर्देश दिए कि जिले को मत्स्य क्षेत्र में पूरी तहर आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य करें

मत्स्य पालन के क्षेत्र में किसान बन्धुओं को प्ररित करें और जिला बिजनौर के लिए प्रेरक बने। मत्स्य पालक हेमन्त कुमार द्वारा मत्स्य पालन के लिए इच्छुक स्थानीय किसानों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि मत्स्य, अंडा और शहद के मैदान में जिला बिजनौर को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य योजना बनाएं ताकि यहां के किसान देश एवं प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत बनें। उन्होंने मत्स्य अधिकारी को निर्देश दिए कि जिले में मत्स्य पालन के इच्छुक किसानों को आमंत्रित कर उनके प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था करें ताकि उनको उचित मार्गदर्शन उपलब्ध हो सके और मत्स्य के क्षेत्र में उनका योगदान प्राप्त हो सके।
जिलाधिकारी श्री मिश्रा आज दोपहर 12ः30 बजे कलेक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय कक्ष में मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत आयोजित जिला स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए निर्देश दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि जिले में पानी की समुचित उपलब्धता और अनुकूल वातावरण के दृष्टित मत्स्य उद्योग को विकसित करने एवं उसे मत्स्य के क्षेत्र में आत्म निर्भर बनाने की बहुत संभावनाएं हैं, जिसके के लिए यहा व्यापक क्षेत्र भी उपलब्ध है, जिनका समुचित रूप से नियोजन करने से जिले में मत्स्य व्यापार से संबंधित लोगों को लाभान्वित किया जा सकता है। उन्होंने मत्स्य अधिकारी को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना सहित शासन द्वारा मत्स्य से संबंधित संचालित योजनाओं का व्यापक रूप से प्रचार प्रसार करना सुनिश्चित करें और उन्हें मत्स्य व्यापार एवं उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी उपलब्ध कराएं ताकि वे प्रेरित हो कर स्वरोजगार प्राप्त कर सकें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए योजनाओं के लाभार्थियों के चयन में पूर्ण पारदर्शिता बरतें और कोई भी अपात्र व्यक्ति योजना से लाभान्वित न होने पाए।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार द्वारा माह दिसम्बर,2022 में मुख्य मंत्री मत्स्य सम्पदा योजना ¼MMMSY½ नाम से एक नवीन योजना प्रारम्भ की गई है। उन्होंने बताया कि इस योजनान्तर्गत दो परियोजनाएं संचालित की जायेगी, जिनमें एक मनरेगा कनवर्जेन्स अथवा पट्टाधारक द्वारा स्वयं अथवा अन्य विभागों के माध्यम से सुधारे गये ग्राम सभा व अन्य पट्टे के तालाबों में मत्स्य उत्पादन हेतु प्रथम वर्ष निवेश यथा मत्स्य बीज, मत्स्य पूरक आहार, जलापूर्ति संसाधन, दवाएं, जाल आदि के क्रय पर अनुदान उपलब्ध कराया जाता है, जबकि दूसरी योजना के अंतर्गत मनरेगा कनवर्जेन्स अथवा पट्टाधारक द्वारा स्वयं अथवा अन्य विभागों के माध्यम से सुधारे गये ग्राम सभा व अन्य पट्टे के तालाबों में मत्स्य बीज बैंक की स्थापना के लिए स्पान, फ्राई, मत्स्य पूरक आहार, जलापूर्ति संसाधन, हापां, जाल आदि के क्रय पर अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।
उन्होंने बताया कि मत्स्य योजना में तालाबों के ऐसे सभी पट्टा धारक आवेदन कर सकते है, जिनके पट्टे की अवधि में न्यूनमत 4 वर्ष अवशेष हो। योजना हेतु आवेदक को इकाई लागत रू 4.00 लाख प्रति हेक्टेअर पर 40 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जायेगा। एक आवेदक को योजनान्तर्गत अधिकतम 2.0 हेक्टेअर जल क्षेत्र तक लाभ अनुमन्य है। योजनान्तर्गत परियोजनाओं का विवरण, इकाई लागत, आवेदन करने की प्रक्रिया, आवेदन के साथ संलग्न किये जाने वाले अभिलेख व विस्तृत विवरण विभागीय बेवसाइट पर देखा जा सकता है।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी संतोष कुमार, मत्स्य निरीक्षक साजिद हुसैन एवं सत्येंद्र कुमार के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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