“बिजली विभाग की लुका-छिपी लीग:धामपुर के गांव बने प्रयोगशाला!”-“बिजली विभाग से ज्यादा भरोसा अब लालटेन पर है!”
“बिजली विभाग की लुका-छिपी लीग: धामपुर के गांव बने प्रयोगशाला!”
धामपुर – क्षेत्र के कुंडीपुरा, मोहड़ा, पीपला और हैजरी गांवों में इन दिनों बिजली नहीं, बल्कि “आंख-मिचौली प्रतियोगिता” चल रही है। लगता है जैसे उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने ग्रामीण इलाकों को नई स्पोर्ट्स लीग के लिए चुन लिया हो—जहां बिजली आती कम है, और छुपती ज्यादा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली सप्लाई अब सेवा कम और “सरप्राइज पैकेज” ज्यादा बन गई है—कभी 10 मिनट के लिए दर्शन, फिर घंटों का वनवास। हालात ऐसे हैं कि लोग अब पंखे नहीं, उम्मीदों को झल रहे हैं।

भीषण गर्मी में जब सूरज अपना “फुल पावर मोड” ऑन कर चुका है, तब बिजली विभाग ने शायद “सेविंग मोड” एक्टिव कर रखा है। नतीजा ये कि पानी की टंकियां सूखी, मोटरें खामोश और लोग पसीने से तरबतर—मानो गांव नहीं, स्टीम बाथ सेंटर बन गए हों।
रात का नज़ारा भी कम दिलचस्प नहीं—जहां शहरों में लोग एसी में खर्राटे ले रहे हैं, वहीं गांवों में लोग मच्छरों के साथ “ओपन एयर मीटिंग” कर रहे हैं। नींद अब बिजली के भरोसे है, और बिजली… अपने मूड के।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतें करने के बावजूद विभाग “ध्यान मुद्रा” में बैठा है—शायद उन्हें भी बिजली का इंतजार है!
अब सवाल ये है कि क्या ये “बिजली लीला” यूं ही चलती रहेगी या कभी स्थायी समाधान भी मिलेगा? फिलहाल तो गांव वाले यही कह रहे हैं—
“बिजली विभाग से ज्यादा भरोसा अब लालटेन पर है!”
📡 आईरा न्यूज़ नेटवर्क
धामपुर-संवाददाता: वसीम अहमद


















