किसान धरने की कवरेज करने गए पत्रकारों पर हमला,वर्दी के रौब में दबंगई का आरोप-आईरा ने की घटना की निंदा
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किसान धरने की कवरेज करने गए पत्रकारों पर हमला, वर्दी के रौब में दबंगई का आरोप
नहटौर (बिजनौर)।
नहटौर क्षेत्र में किसान धरने की निष्पक्ष कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों के साथ कथित तौर पर अभद्रता, धक्का-मुक्की और धमकी देने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना को पत्रकारिता और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार बताया जा रहा है। आईरा संगठन ने घटना की निदा की है
आरोप है कि कवरेज के दौरान वन विभाग के एक सिपाही मलिक ने पत्रकारों के कार्य में जानबूझकर बाधा डाली, खुलेआम धमकाया और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। मौके पर मौजूद पत्रकार मोहम्मद फैजान और नीरज भारद्वाज ने बताया कि उनसे कहा गया— “जो छापना है छाप दो, यहां से भागो।”



प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वर्दी के रौब में दबंगई दिखाते हुए पत्रकारों को डराने-धमकाने की कोशिश की गई। बताया जा रहा है कि पत्रकारों के साथ यह दूसरी बार बदसलूकी की घटना है, जिससे पत्रकार समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त है।
किसान धरना और आम के बागों की कटाई से जुड़ा विवाद
घटना का संबंध क्षेत्र में आम के फलदार बागों की कटाई के मुद्दे और उससे जुड़े किसान धरने से भी बताया जा रहा है। किसानों की समस्याएं और प्रशासनिक कार्रवाई की सच्चाई सामने आने पर विवाद और अधिक गरमा गया।
घटना के बाद पत्रकार संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए थानाध्यक्ष नहटौर को शिकायती पत्र सौंपा है और आरोपी सिपाही पर एफआईआर दर्ज करने की मांग तेज कर दी है। साथ ही वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
क्या अब किसान आंदोलन की कवरेज करना अपराध बन गया है?
क्या वर्दी की आड़ में पत्रकारों को डराया-धमकाया जा सकता है?
पत्रकारिता के कार्य में बाधा डालने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
क्या सच दिखाने वालों को चुप कराने की साजिश है?
क्या आरोपी सिपाही पर एफआईआर दर्ज होगी या मामला दबा दिया जाएगा?





