धामपुर – थाना क्षेत्र के ग्राम पाली मांडू में सरकारी स्कूल में बिना अनुमति के स्कूल खोल कर बरात को ठहराया गया और जमकर प्राथमिक विद्यालय में जाम से जाम टकराये जी हाँ जिसको शिक्षा का मंदिर कहाँ जाता है। जहाँ पर भारत का सुनहरा कल कहे जाने वाले बच्चों को शिक्षा दी जाती है उस पवित्र जगह पर कॅरोना की सभी गाइड लाइन को ताक पर रख सारी मर्यादाओ की धज्जियां उड़ाई गई।
जब हमारी टीम कवरेज करने पहुंचे तो कुछ लोग मीडिया कर्मियों से ही उलझते नजर आए उनका कहना था हमने प्रधानाचार्य से अनुमति ली है तो क्या प्रधानाचार्य ने विद्यालय में जाम से जाम टकराने की अनुमति दी थी इस संबंध में एक व्यक्ति ने प्रधानाचार्य के पति से फोन पर वार्ता कराई तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ लिया कहा हमें नहीं मालूम हमने कोई अनुमति नही दी है।
ग्राम का प्राथमिक विद्यालय ग्राम प्रधान की देखरेख में होता है। सूत्रों की माने तो शिक्षा के मंदिर की छवि को धूमिल करने में ग्राम प्रधान की छवि और कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगता है। इस संबंध मे ग्राम प्रधान से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नही हो सका।
वही इस संबंध में जब हमने खंड शिक्षा अधिकारी सुभाष कुमार से फोन पर वार्ता की तो उन्होंने बताया मामला संज्ञान में नहीं है आपके द्वारा बताया गया है इस संबंध में जांच कर स्कूल स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना ये है कि आखिर किस की अनुमति से कोरोना गाइडलाइन और शिक्षा के मंदिर की मान मर्यादा की धज्जियाँ उड़ाई गई
उसके खिलाफ क्या कार्यवाही होगी या जांच के नाम पर फीलगुड कर मामले को रफा दफा कर दिया जाएगा।


















