बांझ क्या जाने प्रशव की पीड़ा कहावत को चरितार्थ करते शजहाँपुर गौशाला के कर्ता-धर्ता
छिवरामऊ(कन्नौज) – योगी सरकार में गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए जनपद की प्रत्येक ग्राम सभाओं में अस्थाई और स्थाई रूप से सैकड़ों की तादाद में गौशालाओं का निर्माण किया गया जिसमें गोवंश के भोजन, रहन -सहन, चिकित्सा पर सरकार के करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं स्थानीय अधिकारियों और ग्राम प्रधानों ब सचिवों की मिलीभगत और बंदरबांट के चलते ऊपर से आई धनराशि गौशालाओं में गौ वंश के लिए ऊँट के मुँह जीरा साबित हो रही है !
गायों को मिलता सूखा भूसा बीमार जानवरों को नहीं मिलता समय पर इलाज !जिसके चलते गायों का बुरा हाल छिबरामऊ ब्लॉक की शहजहांपुर गौ शाला की ग्राउंड जीरो रिपोर्टिंग करते आईरा संबाददाता दीप सिंह ने जब वहां का नजारा देखा तो लगभग 5 दर्जन गोवंश के आगे सूखा भूसा गन्दा पानी रखा हुआ दिखाई दिया ज्यादातर गोवंश लहूलुहान दिखाई दिए इस बाबत जब संवाददाता ने वहां के केयरटेकर धर्मेंद्र से बातचीत की तो उसने सचिव पवन कुमार यादव और ग्राम प्रधान नाजवीन से इस बारे में बात चीत करने को कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया !
कहने का मतलब योगी जी के गोवंश के संरक्षण हेतु चलाए गए अभियान की कमान ऐसे लोग संभाल रहे हैं जिनके लिए बिल्ली को दूध की रखवाली वाली कहावत चरितार्थ होती नजर आ रही है।
दीप सिंह की रिपोर्ट


















