आखिर ऐसी आपदा देवभूमि उत्तराखंड में ही क्यों?
देवभूमि उत्तराखंड में 2013 को जो तबाही हुई थी अभी लोग उसके जख्म भरे भी नहीं थे एक और 2021मैं चमोली में आई घटना ने लोगों को हिला कर रख दिया जिसमें कई लोगों ने अपनी जान गवा दी कई लोग घायल हो गए विषय यह है क्या विकास के नाम पर प्रकृति से खिलवाड़ हो रहा है प्राकृतिक संतुलन को लेकर कुछ लोग सवाल उठा रहे थे
ऋषि गंगा प्रोजेक्ट को लेकर सवाल उठ रहे थे जिसमें एक कार्यकर्ता कुंदन सिंह राणा हर जगह लोगों को जागरूक कर रहे थे कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ हो रहा है और अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे थे शासन प्रशासन को भी अवगत करा रहे थे परंतु शासन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया क्या सरकार को इस विषय पर गंभीरता से नहीं सोचना चाहिए कहीं विकास के नाम पर विनाश तो नहीं हो रहा है
सरकार को एक कमेटी गठित कर कर इसमें मंथन करना चाहिए अगर ऐसी आपदा आती रही तो पहाड़ों पर क्या बचेगा लोगों की जान का नुकसान तो है ही साथ में सरकारी पैसे की बर्बादी भी है क्या फिर से सरकारी विचार करेंगे इस विषय पर के उत्तराखंड मैं विकास किस तरीके से किया जाना चाहिए यह किस तरीके से हो
चमोली की आपदा में जो तबाही हुई है उसकी भरपाई कर पाना तो बहुत मुश्किल है परंतु गौर करने वाली बात यहां पर यह भी है बचाव कार्य तुरंत ही मौके पर पहुंच गए थे जिसकी वजह से जान का नुकसान कम से कम हुआ और बचाव कार्य तेजी से चल रहा है यह बहुत कदम सरकार का खुद माननीय प्रधानमंत्री जी माननीय मुख्यमंत्री जी सीधे जुड़े
यहां पर तारीफ हौसला अफजाई उन लोगों की भी होनी चाहिए शासन व पुलिस प्रशासन की भी जिसने अपनी पूरी ताकत लगा दी इस राहत और बचाव कार्य में
ब्यूरो हेड राजेश सिंघल की रिपोर्ट




























