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एंडोमेट्रियल कैंसर: जब असामान्य रक्तस्राव को कभी अनदेखा नहीं करना चाहिएडॉ. रोहित रानाडे

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एंडोमेट्रियल कैंसर: जब असामान्य रक्तस्राव को कभी अनदेखा नहीं करना चाहिए
डॉ. रोहित रानाडे, वरिष्ठ परामर्शदाता – स्त्री रोग कैंसर विशेषज्ञ एवं रोबोटिक शल्य चिकित्सक, नारायणा स्वास्थ्य नगर, बेंगलुरु

कुछ लक्षणों के माध्यम से शरीर हमें धीरे-धीरे संकेत देता है कि कुछ ठीक नहीं है। चुनौती यह है कि हममें से अनेक लोग उन संकेतों को अनदेखा करने के अभ्यस्त हो चुके हैं, विशेषकर जब वे महिलाओं के स्वास्थ्य से संबंधित हों।

ऐसा ही एक लक्षण है गर्भाशय से असामान्य रक्तस्राव, विशेष रूप से रजोनिवृत्ति के उपरांत होने वाला रक्तस्राव। यद्यपि यह हानिरहित प्रतीत हो सकता है या हार्मोन परिवर्तन का परिणाम माना जा सकता है, किंतु यह कभी-कभी एंडोमेट्रियल कैंसर, अर्थात् गर्भाशय के सर्वाधिक सामान्य कैंसर का सबसे पहला चेतावनी संकेत हो सकता है।

आशाजनक बात यह है कि कई कैंसरों के विपरीत, एंडोमेट्रियल कैंसर प्रायः स्वयं को शीघ्र ही प्रकट कर देता है। वस्तुतः, एंडोमेट्रियल कैंसर से ग्रस्त लगभग 90 प्रतिशत महिलाओं में पहला लक्षण योनि से असामान्य रक्तस्राव होता है। यह आरंभिक चेतावनी समय पर रोग-निर्धारण और उपचार का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।

एंडोमेट्रियल कैंसर गर्भाशय के अस्तर से आरंभ होता है, जिसे अंतर्गर्भाशयकला कहते हैं। यह सामान्यतः रजोनिवृत्ति के पश्चात महिलाओं में पाया जाता है, यद्यपि अल्प आयु की महिलाओं को भी यह हो सकता है। समस्त भारत में एंडोमेट्रियल कैंसर के मामले निरंतर बढ़ रहे हैं, जिसका आंशिक कारण मोटापा, मधुमेह, बैठे रहने वाली जीवनशैली तथा बढ़ती जीवन प्रत्याशा है।

अनेक कारण एक महिला के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इनमें मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कुछ कैंसर का पारिवारिक इतिहास, प्रोजेस्टेरोन के बिना एस्ट्रोजन के दीर्घकाल तक संपर्क में रहना, तथा बहुअंतःस्रावी चयापचय अंडाशय संलक्षण (PMOS) जैसी स्थितियाँ सम्मिलित हैं। जिन महिलाओं ने कभी गर्भधारण नहीं किया अथवा जिन्हें देर से रजोनिवृत्ति हुई, उनमें भी इसका संकट थोड़ा बढ़ सकता है।

एंडोमेट्रियल कैंसर को अनेक अन्य कैंसर से अलग करने वाली बात यह है कि आरंभ में पता चलने पर यह प्रायः पूर्णतः उपचार योग्य होता है। आरंभिक अवस्था में निदान पाने वाली अधिकांश महिलाओं के दीर्घकालिक परिणाम उत्कृष्ट होते हैं। मुख्य बात है लक्षणों को पहचानना और शीघ्र ही चिकित्सक से संपर्क करना।

रजोनिवृत्ति के पश्चात किसी भी प्रकार का रक्तस्राव, चाहे एक बार ही क्यों न हुआ हो, सदैव चिकित्सक से जाँच करवाना चाहिए। इसी प्रकार, जो महिलाएँ अभी तक रजोनिवृत्ति तक नहीं पहुँची हैं, उन्हें यदि असामान्य रूप से भारी मासिक धर्म, दो मासिक धर्मों के मध्य रक्तस्राव अथवा निरंतर अनियमित रक्तस्राव हो तो चिकित्सक का परामर्श लेना चाहिए।

रोग-निर्धारण में सामान्यतः श्रोणि परीक्षण, ध्वनि-चित्रण तथा गर्भाशय के अस्तर का नमूना लेना सम्मिलित होता है। चिकित्सा तकनीक में उन्नति ने उपचार के विकल्पों को भी परिवर्तित कर दिया है। आज अनेक रोगी न्यूनतम चीरा-फाड़ वाली एवं रोबोट-सहायता प्राप्त शल्य चिकित्सा का लाभ उठा सकते हैं, जिससे प्रायः छोटे चीरे, कम पीड़ा, शीघ्र स्वस्थ होना तथा दैनिक कार्यों में शीघ्र वापसी संभव होती है।

संभवतः सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है: असामान्य रक्तस्राव को सामान्य न समझें। महिलाएँ प्रायः अपने लक्षणों की उपेक्षा कर परिवार के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देती हैं। फिर भी जब एंडोमेट्रियल कैंसर की बात आती है, तो अपने शरीर की सुनना और शीघ्र कदम उठाना बड़ा अंतर ला सकता है।

जागरूकता भय उत्पन्न करने के विषय में नहीं है। यह समझने के विषय में है कि कभी-कभी सबसे छोटा लक्षण ही शरीर का हमें बचाने का माध्यम हो सकता है। जब हम ध्यान देते हैं, तो हम स्वयं को समय पर रोग-निर्धारण, प्रभावी उपचार तथा स्वस्थ भविष्य का सर्वोत्तम अवसर देते हैं।

HALIMA BEGUM

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