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चीनी मिल के नवीनीकरण व विस्तारीकरण पर खर्च हुए करीब 270 करोड़ रुपये: एसीएस देवेन्द्र सिंह

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करनाल: सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग हरियाणा के एसीएस देवेन्द्र सिंह ने स्वर्ण जयंती परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत करनाल सहकारी चीनी मिल के विस्तारीकरण एवं नवीनीकरण के कार्य का निरीक्षण किया और कहा कि करीब 270 करोड़ रुपये की लागत से करनाल सहकारी चीनी मिल के विस्तारीकरण एवं नवीनीकरण के कार्य लगभग पूरा हो गया है। नए मिल के बनने से आसपास के करीब 130 गांवों के किसानों को सीधा लाभ पहुंचेगा और चालू गन्ना पिराई सीजन के दौरान नए मिल से गन्ने की पिराई का कार्य पूरा किया जाएगा।


वे सोमवार को चीनी मिल के नवीनीकरण व विस्तारीकरण के कार्य का निरीक्षण करने उपरांत पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मिल की गन्ना पिराई क्षमता 2200 टी.सी.डी. से बढ़कर 3500 टी.सी.डी. हो गई है। अब उन्हें दूर-दराज के मिलों में गन्ना लेकर जाने की परेशानी से निजात मिल जाएगी। इससे गन्ना किसानों की आय बढ़ेगी और किसान एवं क्षेत्र का चहुंमुखी विकास एवं समृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि मिल में रिफाईंड शुगर का उत्पादन होगा तथा 18 मेगावाट को-जेनरेशन प्लांट चलने से बिजली विक्रय होगी।

About Rs 270 crore spent on renovation and expansion of sugar mill: ACS Devendra Singh
एसीएस देवेन्द्र सिंह

उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने बताया कि नए चीनी मिल से 55 लाख क्विंटल तक गन्ने की पिराई संभव होगी। नए प्लांट की मशीनरी अत्याधुनिक है, इसमें सभी संयंत्र स्वचालित व्यवस्था से कार्य करते है। इसमें अधिक चीनी परता प्राप्त होगा, स्टीम की खपत कम होगी, बगास उपयोग कम होगा। सरप्लस बगास से विद्युत उत्पादित कर उसका विक्रय हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड को किया जाएगा। प्रदूषण का स्तर न्यूनतम रहेगा जिससे क्षेत्र में वातावरण बेहतर रहेगा। सभी संयंत्र स्वचालित होने से उच्च स्तर के परिणाम प्राप्त होंगे। मानवजनित त्रुटि की संभावनाएं लगभग समाप्त हो जाएंगी। प्लांट विश्व स्तरीय उच्च तकनीकी दक्षता पर संचालित होगा।

इस मौके पर मिल की प्रबंध निदेशक अदिति ने बताया कि करनाल सहकारी चीनी मिल के नए विस्तारीकृत आधुनिक प्लांट से रिफाइंड शुगर का उत्पादन होगा एवं सल्फर का उपयोग इस प्लांट में चीनी बनाने में नहीं होगा, फलस्वरूप सल्फर फ्री रिफाईंड शुगर बनेगी जो स्वास्थ्य की लिए अत्यंत लाभप्रद रहेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बाजार के लिए अच्छी गुणवत्ता की चीनी का उत्पादन आवश्यक हो गया है। रिफाइंड गुणवत्ता की चीनी के उत्पादन से करनाल चीनी मिल की साख बढ़ेगी, चीनी के दाम बढऩे से चीनी मिल की आय बढ़ेगी तथा इसकी समृद्धि होगी, जीवंतता बढ़ेगी।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना की घोषणा 20 जनवरी 2018 को हुई, भूमि पूजन 12 सितम्बर 2019 को हुआ तथा 19 नवम्बर 2019 से कार्य प्रारंभ हो गया। नई चीनी मिल को 25 अक्तूबर 2020 तक कार्य पूर्ण होकर गन्ना पिराई प्रारंभ हो जाना था।

कोविड-19 महामारी के आने से विभिन्न समस्याएँ उत्पन्न हुई। सभी सम्बंधित चुनौतियों का सामना एवं निवारण करते हुए परियोजना को न्यूनतम विलम्ब की साथ पूर्ण किया गया। कृषक बंधु, कारीगर भाई एवं ईजक कंपनी, मिल प्रबंधन, स्थानिय प्रशासन की मेहनत एवं लगन से परियोजना को पूर्ण करना संभव हुआ।

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