असम सरकार के पास एपीएससी घोटाले पर रिपोर्ट स्वीकार करने के लिए नहीं है समय।

असम सरकार के पास एपीएससी घोटाले पर रिपोर्ट स्वीकार करने के लिए नहीं है समय।
पंकज नाथ, असम, 1 नवंबर :
असम सरकार के पास असम लोक सेवा आयोग घोटाले की जांच के लिए सरकार द्वारा गठित सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बिप्लब शर्मा आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार करने के लिए समय नहीं है। इस संदर्भ में बिप्लब शर्मा आयोग ने आज एपीएससी घोटाले की अपनी रिपोर्ट राज्य के एक सचिव तराली शर्मा को सौंप दिया है । बिप्लब शर्मा आयोग ने 385 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की थी और 2014 के एपीएससी घोटाले की जांच पूरी करने के बाद सरकार को एक पत्र भेजा था, लेकिन आयोग को असम सरकार से कोई जवाब नहीं मिला। जिसके कारण आज सचिव तराली शर्मा के हाथ में यह रिपोर्ट सौंप दिया। इसके बाद सचिव तारली शर्मा ने असम सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज वर्मा को यह रिपोर्ट सौंपी। जानकारी के अनुसार 2014 के एपीएससी घोटाले की जांच की रिपोर्ट में कुल 15 अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इसमें राज्य के कई शीर्ष अधिकारियों की पत्नियों के नाम शामिल हैं। 2013 की रिपोर्ट में 34 राजपत्रित अधिकारियों के नाम थे। इस बीच, राज्य के मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्वा सरमा ने कुछ दिन पहले बिप्लब शर्मा आयोग द्वारा भेजी गई वर्ष 2013 की एपीएससी घोटाले रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा था कि वर्ष 2014 की रिपोर्ट मिलने के बाद दोनों रिपोर्ट को देखने के बाद कार्रवाई की जाएगी। लेकिन 2014 की रिपोर्ट पूरी होने के बाद भी सरकार को रिपोर्ट स्वीकार करने के लिए समय नहीं मिला । राज्यव्यापी सनसनी पैदा करने वाले एपीएससी घोटाले के संबंध में उच्च न्यायालय के आदेश के तहत गठित सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बिप्लब शर्मा आयोग की जांच समाप्त हो गई है, लेकिन असम सरकार द्वारा इस पर कार्रवाई करने की कोई इच्छा नहीं दिखाई दे रहा है। जिससे सचेत लोगों द्वारा यह उम्मीद की जा रही है कि घुमावदार रास्ते से नौकरी लेने वाले बच जाएंगे। उल्लेखनीय है कि आयोग ने 2013 के एपीएससी घोटाले की जांच को कवर करते हुए करीब डेढ़ साल पहले अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसी खबरें हैं कि इसके बाद 2014 की रिपोर्ट को स्वीकार करने पर इस मुद्दे पर फिर से जवाब देने की डर से सरकार ने इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया है। नियमानुसार आयोग की रिपोर्ट मिलने के छह माह के भीतर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन वर्ष 2013 की घोटाले की रिपोर्ट दाखिल करने के डेढ़ साल पूरे होने के बाद भी किस कारण से सरकार द्वारा कार्रवाई नहीं की गई या फिर 2014 की रिपोर्ट पूरी होने के बाद भी असम सरकार द्वारा इसे स्वीकार करने के लिए क्यों आग्रह नहीं किया, इसपर सवाल उठने लगे हैं। अब सचेत हलकों में काफी चर्चा हो रही है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात कहने वाली असम सरकार का असली चरित्र एपीएससी घोटाले की जांच को लेकर सरकार की लापरवाही से जाहिर हो गया है।


















