नई दिल्ली

वर्ल्ड अक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स व आईरा के राष्ट्रीय सलाहकार की पहल पर,मृतको के परिजनों को मिला साढ़े तीन करोड़ का मुआवजा!

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वर्ल्ड अक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स व आईरा के राष्ट्रीय सलाहकार मानव अधिकार पक्षकार राजीव कुमार शर्मा की पहल पर, मृतको के परिजनों को मिला साढ़े तीन करोड़ का मुआवजा

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दिल्ली– गाजियाबाद निवासी मानव अधिकार पक्षकार राजीव कुमार शर्मा की पहल पर आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा जिले में मारे गए 7 मजदूरों की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा संज्ञान लेकर कार्यवाही करने के बाद मृतक मजदूरों के परिवारों को मिला साढ़े तीन करोड़ रुपये का मुआवजा ।

आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले में 9 फरवरी को एक ऑयल फैक्ट्री में तेल के टैंक की सफाई करने के दौरान दम घुटने से सात लोगो की मौत हो गयी थी, इस मामले में मीडिया में प्रकाशित समाचार को आधार बनाकर गाजियाबाद निवासी मानव अधिकार पक्षकार राजीव कुमार शर्मा ने 10 फरवरी को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग नई दिल्ली में एक जनहित याचिका दायर करते हुए मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिलवाने और घटना के ज़िम्मेदार फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ अभियोग दर्ज करवा कर कानूनी कार्यवाही करने की माँग की थी ।

मानव अधिकार पक्षकार राजीव कुमार शर्मा ने बताया कि मानव अधिकार आयोग ने 10 फरवरी को ही इस घटना को एक गम्भीर प्रकरण मानते हुए उनकी जनहित याचिका को स्वीकार कर इस मामले में केस दर्ज करते हुए काकीनाड़ा जिले के डीएम और एस एस पी को नोटिस जारी कर घटना के सम्बंध में की गई कार्यवाही की रिपोर्ट चार सप्ताह में आयोग के समक्ष पेश करने के आदेश दिए थे ।

काकीनाड़ा जिले के एस एस पी की और से आयोग को प्रेषित रिपोर्ट में बताया गया कि इस मामले में काकीनाड़ा जनपद के बिशा थाने में धारा 304ए आई पी सी और अनुसूचित जाति एवम जनजाति अधिनियम की धारा 3 की उपधारा 2 के तहत, मुकदमा अपराध संख्या 65 /2023 दर्ज कर घटना के जिम्मेदार अभियुक्तों को 11 फरवरी को ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है ।

वही डीएम काकीनाड़ा द्वारा 10 मार्च को आयोग को प्रेषित रिपोर्ट में बताया गया कि घटना में मारे गए 7 मजदूरों में से 5 मजदूर अनुसूचित जनजाति के थे, अनुसूचित जनजाति के पांचों मजदूरों के परिजनों को एक एक लाख रुपये तो जिला प्रशासन द्वारा मुकदमा दर्ज होने के उपरांत ही दे दिए गए थे वही अनुसूचित जनजाति से सम्बन्ध रखने वाले 5 मजदूरों के परिवार वालो को 5 – 5 लाख रुपये की वाई एस आर बीमा योजना का भी सरकार की और से लाभ दिया है । वही सभी मजदूरों के परिजनों को पच्चीस पच्चीस लाख रुपये आंध्र प्रदेश सरकार की और से एवम पच्चीस पच्चीस लाख रुपये फैक्ट्री प्रबंधन की और से मुआवजे के रूप में दिए जा चुके है ।

इस मामले में डीएम और एस एस पी द्वारा आयोग को उपलब्ध करवाई गई रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने आंध्र प्रदेश राज्य के मुख्य सचिव पुलिस महानिदेशक और काकीनाड़ा जिले के डीएम और एस एस पी को घटना में मारे गए मृतको के परिजनों को मुआवजे के रूप में अदा की गई धनराशि के प्रमाण सहित चार सप्ताह में रिपोर्ट उपलब्ध कराने के आदेश जारी किये थे, आयोग ने सभी अधिकारियों को चेतावनी भरा नोटिस जारी किया था कि अगर सम्बंधित अधिकारी इस मामले में मृतको के परिजनों को किये गए मुआवजे के भुगतान का प्रमाण उपलब्ध नही कराते है तो सभी अधिकारियों के विरुद्ध मानव अधिकार सुरक्षा अधिनियम 1993 की धारा 13 के तहत उत्पीड़नात्मक कार्यवाही भी की जाएगी ।

इस मामले में काकीनाड़ा के डीएम द्वारा पुलिस और राज्य सरकार की और से 16 जून 2023 को आयोग को प्रत्येक मृतक के परिजनों को मुआवजे के रूप में अदा किये गए पचास पचास लाख रुपये के भुगतान की प्रमाण सहित उपलब्ध कराई रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए मानव अधिकार आयोग ने 17 जुलाई को इस केस का निस्तारण कर दिया है ।

मानव अधिकार आयोग के माध्यम से फैक्टरी मजदूरों के परिवारों को मिलने वाला अब तक का सबसे अधिक मुआवजा ।

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