विशेष-हज़रत मौलाना शाह मिन्नतउल्लाह रहमानी हिन्दुस्तान की जंग ए आज़ादी के अज़ीम सुरमाओं में से थे
दिल्ली-आयान शादाब

हज़रत मौलाना शाह मिन्नतउल्लाह रहमानी हिन्दुस्तान की जंग ए आज़ादी के अज़ीम सुरमाओं में से थे
1912 में बिहार के मुंगेर ज़िले के हज़रत मौलाना मुहम्मद अली मुंगेरी(र.अ.) के घर पैदा हुए,
शुरुआती तालीम घर पर हासिल की बाद में तालीम के लिए दारुल उलुम देवबंद गए और शेख़ उल हिन्द महमुद हसन (र.अ) के शागिर्दों में शामिल हों गये
1933 , सविनय अवज्ञा आंदोलन में तहरीक ए आज़ादी का कांरवां ले कर दिल्ली के चांदनी चौक एक एहतेजाजी जलसा करने पहुंचे तो पुलिस ने लाठियां बरसाई, मौलाना सहित कई लोग ज़ख़्मी हुए, फिर गिरफ़्तार किए
जेल से बाहर आने के बाद मौलाना को इन्कलाबी बेदारी लाने के लिए सहारनपुर की ज़िम्मेदारी दी महज़ 22 साल की उम्र में इंक़लाबी तक़रीरों और तहरीरो से अवाम के अंदर एक नया जोश भर दिया,
उनकी ‘अल-इमारत’मे शाए होने वाली इंक़लाबी तहरीरो को अंग्रेज़ो ने इस बाग़ीयाना समझा और मुक़दमा चलाया, सविनय अवज्ञा आंदोलन के वक़्त बैन कर दिया था तब ‘नक़ीब’ नाम से एक रिसाला निकाला गया जिसने और मज़बुती से अपनी बात रखी और इस रिसाले में कई इंक़लाबी मज़ामीन लिखे,
1937 के इलेकशन में मौलाना ने मुस्लिम इंडिपेंडेट पार्टी के टिकट पर मुंगेर से भारी मतों से जीत हासिल की,
मौलाना मिन्नतउल्लाह रहमानी ने खुल कर मुस्लिम लीग और 1940 के लाहौर अधिवेशन की मुख़ालफ़त की,
वैसे 1934 के जलज़ले के दौरना भी ख़ानक़ाह रहमानीया मुंगेर ने हिन्दुस्तान के कई बड़े रहनुमाओं का स्वागत किया था, जलज़ले से मुतास्सिर लोगों की मदद और हाल चाल लेने जब गांधी जी, पंडित नेहरु और ग़फ़्फ़ार ख़ान मुंगेर आए थे तो उन्होने ख़ानक़ाह को ही अपना हेडक्वाटर बनाया था, ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान ख़ुदाई ख़िदमतगार तहरीक के रज़ाकारों के साथ यहां 15 दिन ठहरे थे ताके जलज़ले से मुतास्सिर लोगों की मदद कर सकें, इनसे पहले बी अम्मा और उनके साहेबज़ादे अली बेराद्रान मौलाना शौकत अली और मौलाना मुहम्मद अली जौहर भी यहां तशरीफ़ ला चुके थे
1972 में मौलाना मिन्नतउल्लाह रहमानी की फ़िक्र की वजह कर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का क़याम हो पाया और आपका इंतक़ाल साल 1991 में हुआ, आपने अपने आख़री वक़्त में भी मुल्क और क़ौम की फ़िक्र करना नही छोड़ा,


















