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रक्षा बंधन से जुड़ी जानकारी

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रक्षा बंधन से जुड़ी जानकारी

संस्कृत ग्रंथ पीयूष धारा के अनुसार:

स्वर्गे भद्रा शुभं कुर्यात पाताले च धनागम।
मृत्युलोक स्थिता भद्रा सर्व कार्य विनाशनी

अर्थात : भद्रा स्वर्ग में हो तो शुभ होती है। पाताल लोक में हो तो धन की प्राप्ति होती है। लेकिन मृत्युलोक में होने से वह सभी कार्यों की विनाशक है।

 
मुहूर्त मार्तण्ड ग्रंथ भी इसकी पुष्टि करता है

“स्थिताभूर्लोख़्या भद्रा सदात्याज्या स्वर्गपातालगा शुभा”

अत: ज्यादा बहम में न पडें। 11 अगस्त को 10:38 से 12 अगस्त को सुबह 7:05 तक कभी भी रक्षा सूत्र बंधवा सकते हैं।

नोट : केबल राहुकाल में 11 अगस्त को दोपहर 1:30 से 3:00 तक रक्षा सूत्र न बंधवाये यह अशुभ माना गया है। वहीं रात्रि में भी रक्षा सूत्र बांधना अशुभ माना गया है।

महकार सिंह तोमर।

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