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“72 वर्षीय मां को बहू ने किया बेघर, कमरे में जड़ा ताला – न्याय के लिए भटक रही वृद्धा”

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“72 वर्षीय मां को बहू ने किया बेघर, कमरे में जड़ा ताला – न्याय के लिए भटक रही वृद्धा”

📍स्थान: धामपुर (बिजनौर), संवाददाता

थाना शेरकोट क्षेत्र के मोहल्ला शेखान की रहने वाली 72 वर्षीय वृद्धा विजयबाई जैन ने अपनी ही पुत्रवधू पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसने न केवल उन्हें घर से बाहर निकाल दिया, बल्कि उनके कमरे में ताला जड़कर सामान भी बाहर फेंक दिया। पीड़िता ने इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शिकायत भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।

🧓 “अपनों ने ही उजाड़ दिया जीवन का अंतिम सहारा”

विजयबाई ने बताया कि उनके पति की पैतृक संपत्ति शेखान मोहल्ले में स्थित है, जहाँ वह अपने तीनों पुत्रों के साथ वर्षों से रह रही थीं। बीते कुछ वर्षों से वह अपने दो बेटों के पास पुणे में निवास कर रही थीं, लेकिन तीसरे बेटे का परिवार उसी पुश्तैनी घर में रह रहा था। दुर्भाग्यवश, तीसरे बेटे की मृत्यु के बाद बहू का व्यवहार बदल गया।

17 अप्रैल को बदली ज़िंदगी

विजयबाई 17 अप्रैल को पुणे से लौटकर जब घर पहुँचीं तो उन्होंने पाया कि उनका कमरा बंद है, दरवाज़े पर ताला लगा है और उनका सामान बाहर फेंका जा चुका है। आरोप है कि पुत्रवधू ने अपने भाइयों के साथ मिलकर न सिर्फ़ संपत्ति पर अवैध कब्जे की कोशिश की, बल्कि बुज़ुर्ग मां को भी बेघर कर दिया।

🚨 प्रशासन बना मौन दर्शक

विजयबाई का कहना है कि उन्होंने इस अन्याय के विरुद्ध कई बार स्थानीय प्रशासन व पुलिस से शिकायत की, लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हुई। अंततः उन्होंने अपनी पीड़ा को मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों तक पहुँचाया है।

⚖️ कानूनी पहलू भी गंभीर

बुज़ुर्ग महिला को घर से बाहर निकालना “वरिष्ठ नागरिक संरक्षण अधिनियम 2007” के तहत दंडनीय अपराध है।

➤ अधिनियम के अनुसार, माता-पिता को संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता, चाहे घर बेटे के नाम हो या न हो।
➤ दोषी पाए जाने पर जेल या जुर्माने का प्रावधान है।

🗣️ क्या कहते हैं सामाजिक कार्यकर्ता?

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला बुज़ुर्गों के खिलाफ घरेलू हिंसा की एक और दुखद मिसाल है। यदि समय रहते हस्तक्षेप न किया गया, तो वृद्धा का मानवाधिकार और आत्मसम्मान दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।

🛑 अब सवाल उठता है—

क्या बहू पर कोई कानूनी कार्रवाई होगी?

क्या प्रशासन संवेदनशीलता दिखाएगा?

क्या विजयबाई को उनका हक़ और सम्मान वापस मिलेगा?
समाज की नींव माता-पिता होते हैं। अगर वही सुरक्षित नहीं, तो विकास किस काम का?

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