वाराणसी/उत्तरप्रदेशशहर

प्रारंभिक निदान और स्वास्थ्य संरक्षण पर केंद्रित स्वास्थ्य शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला

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वाराणसी, 10.02.2026। आम जन में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य विषयों के प्रति जागरूकता के प्रसार के उद्देश्य से चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, द्वारा स्वतंत्रता भवन में स्वास्थ्य शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया। व्याख्यान का उद्देश्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य विषयों के संबंध में उपयोगी जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना तथा रोग नियंत्रण, प्रारंभिक निदान, सरल पहचान तथा प्रभावी रोकथाम रणनीतियों के प्रति जनमानस को संवेदनशील बनाने एवं स्वास्थ्यकर्मियों की समझ को और विकसित करना रहा।
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अपने वक्तव्य में इस पहल के लिए चिकित्सा विज्ञान संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार के प्रयास विश्वविद्यालय की व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। प्रो. चतुर्वेदी ने यह भी उल्लेख किया कि ऐसे कार्यक्रमों की शुरुआत करना भले ही चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन जैसे-जैसे सहभागिता बढ़ती है, इन्हें निरंतर और प्रभावी रूप से संचालित करना अपेक्षाकृत सरल हो जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के व्याख्यान से पुरे विश्वविद्यालय समुदाय को लाभ होता है, खासकर तब जब विषय विशेषज्ञ आम मिथकों और व्यवहारिक चिन्ताओ को आसान भाषा में बताकर गैर मेडिकल श्रोताओं के लिए तकनिकि विषय को आसान बना देते है। कुलपति ने वक्ताओं कि सराहना करते हुए कहा कि ऐसे जटिल विषयों को इतने साधारण भाषा में आम जन मानस को समझाना प्रशंसनीय है। उन्होंने व्याख्यान के अगले संस्करण को जल्दी घोषित करने कि अपील भी की। प्रो. चतुर्वेदी ने ऐसे परिसर के अन्दर सुलभ और सहभागी संस्कृति पर जोर दिया और भविष्य ऐसे अधिक आउटरिच कार्यक्रमों के आयोजन की उम्मीद जताई।
प्रो. ललित प्रशांत मीणा, विभागाध्यक्ष, जनरल मेडिसिन विभाग, आईएमएस, बीएचयू ने “उच्च रक्तचाप: जागरूकता, रोकथाम एवं नियंत्रण” विषय पर व्याख्यान दिया। अपने व्याख्यान में डॉ. मीणा ने भारत में उच्च रक्तचाप के बढ़ते बोझ पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल वृद्ध जनसंख्या तक सीमित नहीं है। उन्होंने रक्तचाप एवं मधुमेह से जुड़े सामान्य मिथकों पर चर्चा की, श्रोताओं के प्रश्नों का उत्तर दिया तथा प्रचलित भ्रांतियों को दूर किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह करते हुए कहा, “अपने लिए और कम से कम अपने शरीर के लिए तो स्वार्थी बनिए और नियमित रूप से व्यायाम कीजिए।” डॉ. मीणा ने नियमित रक्तचाप जांच, शारीरिक सक्रियता, पर्याप्त नींद, वजन नियंत्रण, तनाव में कमी तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने को उच्च रक्तचाप की रोकथाम और उससे होने वाली गंभीर जटिलताओं से बचाव के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
प्रो. बिक्रम कुमार गुप्ता, क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग, ने “चिकित्सीय आपात स्थितियों में जीवनरक्षक कौशल” विषय पर अपने विचार साझा किए। अपने संबोधन में उन्होंने विशेष रूप से अचानक होने वाले हृदयाघात कि स्थिति में जीवनरक्षक कौशलों के महत्व पर जोर दिया। उनके व्याख्यान का प्रमुख आकर्षण सीपीआर कि एक विस्तृत प्रस्तुति रही, जिसमें विद्यार्थियों की भी सक्रिय भागीदारी रही। इस प्रदर्शन के माध्यम से प्रतिभागियों को छाती पर दबाव (चेस्ट कंप्रेशन) की सही तकनीक, गति, गहराई और क्रम, रेस्क्यू ब्रीथ् की विधियाँ, आपातकालीन सेवाओं को समय पर सक्रिय करने तथा ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) के उपयोग की स्पष्ट और व्यावहारिक जानकारी दी गई।
डॉ. अभिषेक पांडे, जनरल मेडिसिन, ने “मधुमेह: जागरूकता, शीघ्र पहचान एवं रोकथाम” विषय पर अपने व्याख्यान में मधुमेह मेलिटस पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसके विभिन्न प्रकारों की जानकारी दी तथा इसे एक बढ़ती हुई जनस्वास्थ्य चुनौती बताया। उन्होंने बताया कि मधुमेह के अधिकांश मामले टाइप-2 मधुमेह के होते हैं, जिसका प्रमुख कारण जीवनशैली से जुड़े कारक हैं। व्याख्यान में अस्वस्थ आहार आदतें, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा, तनाव तथा आनुवंशिक प्रवृत्ति जैसे जोखिम कारकों पर विशेष जोर दिया गया। डॉ पांडे ने मधुमेह की प्रारंभिक रोकथाम एवं प्रभावी प्रबंधन के महत्व को रेखांकित करते हुए नियमित शारीरिक गतिविधियाँ, संतुलित पोषण, वजन नियंत्रण तथा नियमित स्वास्थ्य जांच अपनाने कि सलाह दी जिससे समाज में मधुमेह के जोखिम और बोझ को कम किया जा सके।
व्याख्यान श्रृंखला में संकाय सदस्यों, विद्यार्थीयों तथा अन्य प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली, जिसमें प्रश्न–उत्तर के संवाद सत्र आयोजित किए गए। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने भी कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया तथा चर्चा के दौरान वक्ताओं से संवाद कर अपने विचार साझा किए।
व्याख्यान श्रृंखला के अध्यक्ष प्रो. सत्य नारायण संखवार, निदेशक, चिकित्सा विज्ञान संस्थान ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. संजय गुप्ता, संकाय प्रमुख, चिकित्सा संकाय, आयोजन सचिव, द्वारा किया गया। डॉ. रंजन कुमार सिंह, छात्र अधिष्ठाता, कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। व्याख्यान श्रृंखला का संचालन डॉ. कविता मीणा, एनेस्थेसियोलॉजी विभाग, तथा प्रो. किरण आर. गिरि, औषध विज्ञान विभाग द्वारा किया गया।

Sallauddin Ali

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