रेस्टोरेंट-कैफे की आड़ में चल रहे ‘अय्याशी के अड्डे’, प्रशासन मौन, राजस्व को भी लग रहा चूना

काशीपुर / उत्तराखंड (रिज़वान अहसन ),,,,शहर में खुले कई रेस्टोरेंट और कैफे अब खाने-पीने की जगह ‘अय्याशी के अड्डे’ बनते जा रहे हैं। नाम के बोर्ड तो कैफे के लगे हैं, लेकिन अंदर का नजारा कुछ और ही बयां करता है। कई जगह तो हालत यह है कि कैफे में टेबल-कुर्सी के अलावा कुछ नहीं है, फिर भी प्रेमी जोड़ों से 200 से 500 रुपये प्रति घंटा तक वसूले जा रहे हैं।*बिल-रसीद का कोई झंझट नहीं, कैश में चल रहा खेल* स्थानीय सूत्रों के अनुसार, शहर के कई इलाकों में खासकर कॉलेज-कोचिंग के आसपास खुले कैफे सिर्फ ‘कपल फ्रेंडली’ होने का बोर्ड लगाकर धंधा कर रहे हैं। अंदर न मेन्यू कार्ड है, न कोई स्टाफ। सिर्फ 4-5 कैबिननुमा चेयर और टेबल डालकर घंटे के हिसाब से कमरे जैसी प्राइवेसी दी जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन जगहों पर न कोई बिल दिया जाता है, न रसीद। पूरा लेन-देन कैश में होता है। इससे एक तरफ सरकार को GST और इनकम टैक्स का चूना लग रहा है, वहीं दूसरी तरफ युवाओं को गलत राह पर धकेला जा रहा है।*अभिभावकों में रोष, पुलिस-प्रशासन खामोश* नाम न छापने की शर्त पर एक अभिभावक ने बताया, “बच्चे कोचिंग के नाम पर घर से निकलते हैं और इन कैफे में घंटों बिताते हैं। कैफे संचालक जानबूझकर ऐसी व्यवस्था करते हैं कि बाहर से कुछ नजर न आए।” स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार पुलिस को शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कुछ कैफे संचालकों की पहुंच के चलते प्रशासन भी आंख मूंदे बैठा है।*क्या कहते हैं नियम* नगर निगम और खाद्य सुरक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, कैफे-रेस्टोरेंट में साफ मेन्यू, रेट लिस्ट, बिलिंग सिस्टम और CCTV होना अनिवार्य है। बिना लाइसेंस या तय मानकों के खिलाफ चल रहे प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन जमीनी हकीकत में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं।*प्रशासन से कार्रवाई की मांग* समाजसेवियों और अभिभावकों ने मांग की है कि जिला प्रशासन, पुलिस और खाद्य विभाग संयुक्त टीम बनाकर शहर के सभी कैफे-रेस्टोरेंट की जांच करे। जो भी बिना बिल के कारोबार कर रहे हैं या अनैतिक गतिविधियों में लिप्त हैं, उनके लाइसेंस निरस्त कर कड़ी कार्रवाई की जाए।फिलहाल इस मुद्दे पर नगर निगम या पुलिस का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन शहर में यह चर्चा आम हो चुकी है कि ‘कैफे कल्चर’ के नाम पर काशीपुर में गलत धंधा फल-फूल रहा है


















