विद्युत विभाग वाराणसी: 2000 KVA कनेक्शन में ‘बैक-डेटिंग’ की चर्चा, क्या विभाग को लगेगा लाखों का चूना?

वाराणसी 09 मार्च :प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में नगरीय विद्युत वितरण खण्ड सप्तम एक बार फिर सुर्खियों में है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि यहाँ एक 2000 KVA के नए कनेक्शन की आड़ में कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर विभाग को लाखों रुपये के राजस्व की चपत लगाने की योजना बनाई जा रही है।
मामले की ‘इनसाइड स्टोरी’:
लंबे समय से अधर में मामला: भीठारी क्षेत्र के इस हाई-प्रोफाइल कनेक्शन का आवेदन विगत एक वर्ष से लंबित बताया जा रहा है। आरोप है कि विभागीय प्रक्रिया और आपसी समन्वय की कमी के कारण मामला लटका रहा, जिससे उपभोक्ता की शुरुआती प्रोसेसिंग फीस भी टाइम-लैप्स की भेंट चढ़ गई।
नए रेट बनाम बैक-डेटिंग की आशंका:
विदित हो कि जनवरी 2026 में UPPCL ने बिजली कनेक्शन के नए और बढ़े हुए रेट लागू कर दिए हैं। चर्चा है कि कुछ विभागीय कर्मियों और उपभोक्ता के बीच एक कथित सहमति बनी है, जिसके तहत दिसंबर 2025 के पुराने और सस्ते रेट पर एस्टीमेट पास कराने की कोशिश हो रही है।
इसके लिए फाइलों में ‘बैक-डेटिंग’ (पिछली तारीखों में हस्ताक्षर) का सहारा लिए जाने की आशंका जताई जा रही है।
जिम्मेदारों की भूमिका:
चर्चाओं के बाजार में यह बात भी गर्म है कि पूर्व उपखण्ड अधिकारी के स्थानांतरण के बाद अब यह मामला वर्तमान अधिशासी अभियंता के संज्ञान में है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि उच्च स्तर पर भी इस मामले में ‘मौन सहमति’ बनाने के प्रयास जारी हैं।
राजस्व की हानि का प्रश्न
यदि यह एस्टीमेट वास्तव में पुरानी तारीखों में चोरी-छिपे पास किया जाता है, तो यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने के साथ धोखाधड़ी और पद का दुरुपयोग होगा। इससे सरकार को नए रेट से मिलने वाले अतिरिक्त राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जांच की दरकार
अब सवाल यह उठता है कि क्या उच्चाधिकारी इस ‘बैक-डेटिंग’ के संभावित खेल की निष्पक्ष जांच कराएंगे?
क्या फाइलों की पारदर्शिता जांची जाएगी ताकि भ्रष्टाचार की किसी भी संभावना को खत्म किया जा सके?


















