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“मजदूरों की बेरहमी से पिटाई पर प्रशासन खामोश! मानवाधिकार आयोग में पहुंचा मामला, ₹10 लाख मुआवज़ा और FIR की मांग”

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“मजदूरों की बेरहमी से पिटाई पर प्रशासन खामोश! मानवाधिकार आयोग में पहुंचा मामला, ₹10 लाख मुआवज़ा और FIR की मांग”

मुरादाबाद में मानवता शर्मसार—डॉ. तारिक ज़की की शिकायत पर UP मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, जांच शुरू

लखनऊ/मुरादाबाद:
मुरादाबाद के पाकबड़ा क्षेत्र में मजदूरों के साथ हुई कथित बर्बरता का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस गंभीर घटना ने प्रशासनिक संवेदनहीनता और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए शिकायत को दर्ज कर डायरी नंबर 2054/IN/2026 आवंटित किया है। यह शिकायत डॉ. तारिक ज़की (वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स) द्वारा दर्ज कराई गई है।

शिकायत के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान विभागीय लापरवाही और एक जूनियर इंजीनियर (JE) की कथित दबंगई के चलते मजदूरों के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया गया बल्कि मारपीट भी की गई।
इस अमानवीय घटना में—
एक मजदूर की दोनों टांगे टूट गईं
दूसरा मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया
यह घटना न सिर्फ लापरवाही, बल्कि सीधे तौर पर मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानी जा रही है।

शिकायत में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं—
घटना के बाद केवल औपचारिक (खानापूर्ति) जांच
अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं
आरोपियों के खिलाफ FIR तक दर्ज नहीं
इससे साफ है कि जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
वही डॉ तारीक़ ज़की ने आयोग सर
घायल मजदूर के परिवार को ₹10 लाख मुआवज़ा
आरोपी JE के खिलाफ तत्काल FIR और सख्त कार्रवाई
निष्पक्ष जांच के लिए SIT का गठन
लापरवाह अधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही
घायल मजदूर का मुफ्त इलाज और पुनर्वास
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र की मांग की है

मानवाधिकार आयोग द्वारा शिकायत स्वीकार कर ली गई है और जांच प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कदम उठाता है।
डॉ. तारिक ज़की ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा—
“यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और मजदूरों की उपेक्षा का कड़वा सच है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे मामले लगातार सामने आते रहेंगे।”

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