बढ़ते जलस्तर से बढ़ रही है जनसमस्या, जान पर खेलकर पशु के लिए चारा ला रहे पशुपालक

आईरा न्यूज़ नेटवर्क
स्योहारा। खो नदी का बढ़ता जलस्तर उसके आसपास बसे गांवो के लोगों के लिए आफत बन गया है। खो नदी के किनारे बसे सद्दोबेरखा गावं तक खो नदी का पानी पहुंच गया है। चार माह की मेहनत से तैयार गन्ने की फसल भी पानी में समा गई है। खो नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण सद्दोबेरखा के किसानों की हजारों बीघा गन्ने की फसल बर्बाद हो गई है। पिछले एक दशक से खो नदी का जल स्थिर चल रहा था। बरसात के दौरान नदी के पानी में कुछ बढ़ोतरी जरूर होती थी, लेकिन काफी समय से इस वर्ष की तरह हालात कभी नहीं बने। वर्ष 2008 में खो नदी में आई बाढ़ ने ग्राम सद्दोबेरखा, सिपाहियोंवाला, मुकरपुरी टांडा आदि गांवों में भीषण तबाही मचाई थी। वर्तमान समय में सद्दोबेरखा गांव नदी के कटान पर हैं। अगर नदी का जलस्तर बढ़ता रहा तो इस गांव में किसी भी समय पानी पहुंच जाएगा और पहले जैसे हालात पैदा हो जाएगें।
जान पर खेलकर पशु के लिए चारा ला रहे पशुपालक
ग्राम सद्दोबेरखा के पशुपालक जान पर खेलकर पशु के लिए खो नदी के पानी को पार करने के लिए मजबूर है। ग्रामीणों की इस मजबूरी की विडंबना हर किसी की तिराहने के लिए मजबूर कर रही है। पशुपालक नदी पार करने के लिए अपनी जान हथेली पर लेकर काफी गहरे पानी से गुजरते हैं। इस दौरान इन पशुपालकों की जिंदगी दांव पर लगी होती है। जिसे शासन प्रशासन लगातार नजरअंदाज करता चला आ रहा है।


















