प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के सेवा केन्द्र में विश्व खाद्य दिवस की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम

राँची : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केन्द्र चौधरी बागान, हरमू रोड में विश्व खाद्य दिवस के पूर्व संध्या के अवसर पर कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित मुकेश कुमार सिन्हा, निदेशक राष्ट्रीय बागवानी मिशन
ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 16 अक्टूबर को हम विश्व खाद्य दिवस मनाते हैं। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य विश्व भर में फैली भुखमरी की समस्या के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा भूख, कुपोषण और गरीबी के खिलाफ संघर्ष को मजबूती प्रदान करना है।
कार्यक्रम में उपस्थित ने कहा डी०के० सक्सेना, इंडियन फॉरेस्ट सेवा, झारखंड सरकार ने कहा कि जीवन में सुख शांति व समृद्धि प्राप्त करने के लिए स्वस्थ शरीर की नितांत आवश्यकता है क्योंकि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन तथा बुद्धि का वास होता हैं।
डा० जयप्रकाश पाण्डेय, वैज्ञानिक सेन्ट्रल तसर संस्थान ने कहा मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए उचित निद्रा, श्रम, व्यायाम और संतुलित आहार अति आवश्यक है परंतु केवल भौतिक विकास से ही हमारा कार्य चलने वाला नहीं है। मनुष्य के भौतिक विकास के साथ आध्यात्मिक विकास भी
जरूरी है। हमारा विचार और अन्न शुद्ध होना चाहिए। जीवन में सुख शांति के लिए यह शुद्धि आवश्यक है।
डा० पीयूष रंजन, रजिस्ट्रार राय विश्व विद्यालय ने कहा कि हमारी पृथ्वी में 75 प्रतिशत पानी है परंतु उसमें से 1 प्रतिशत पानी ही उपयोग लायक है। पानी की बर्बादी को हमें हर हाल
में रोकना होगा अन्यथा पीने के लिए पानी मिलना भी मुश्किल होगा। इसके लिए हम सभी को व्यक्तिगत स्तर पर जागरूक होना होगा।
ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए ब्रह्माकुमारीज के कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग द्वारा शाश्वत यौगिक खेती परियोजना प्रारंभ की गई है। हमारे श्रेष्ठ कर्म ही हमारे श्रेष्ठ भविष्य का निर्माण करते हैं। समय की मांग को लेकर वेहतरीन उत्पादन, बेहतर पोषण, वेहतर वातावरण और वेहतर जीवन के लिए ब्रह्माकुमारीज संस्थान से जुड़े हजारों किसानों ने शाश्वत यौगिक खेती की पद्धती को अपनाया है। इस कृषि पद्धति में परमपिता परमात्मा से मन का भावनात्मक संबंध जोड़कर समस्त कृषि कार्य संपन्न किये जाते हैं। बी०के० निर्मला बहन ने मोटे अनाज मिलेटस के उपयोग पर उन्होंने बल दिया यौगिक कृषि में पोषक तत्वों से भरपूर अन्न का उत्पादन होता है। अन्न पवित्र औषधि के रूप में हमारी सुरक्षा करता है। भोजन की प्रकृति का मन पर प्रभाव पड़ता है। आहार संयम हो जाएगा तो वाणी का भी संयम हो जायेगा तो दूसरों के प्रति दुर्भावना भी समाप्त हो जाएगी और धीरे-धीरे दुःखों से मुक्ति मिल जाएगी। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने खाद्य सुरक्षा हेतु शपथ लिया और नारे लगाये।


















