पूर्वोत्तर की लोक कलाओं से गुलज़ार हुआ सरदार पटेल छात्रावास

- पूर्वोत्तर की धुनों पर थिरका बीएचयू परिवार
- नृत्य, गीत और स्वाद का उत्सव : बीएचयू में नार्थ-ईस्ट फेस्ट
- संस्कृति और परंपरा का जश्न- बीएचयू में नार्थ-ईस्ट फेस्ट
- बीएचयू के सरदार पटेल छात्रावास में उत्तर-पूर्वी संस्कृति का भव्य उत्सव
- जुबिन गर्ग को संगीतमय श्रद्धांजलि
वाराणसी, 08.02.2026।
पूर्वोत्तर उत्सव में हुए सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भारत का वैभव दिखा। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सरदार वल्लभभाई पटेल छात्रावास में रविवार को नॉर्थ–ईस्ट फेस्ट मनाया गया। आयोजन उत्तर-पूर्व भारत की जीवंत संस्कृति, संगीत, नृत्य और स्वाद का शानदार उत्सव बन गया, जिसे देखने और महसूस करने के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं दर्शक उमड़े।
मंच पर जब बीहू, चेराव (बांस नृत्य), होज़ागिरी, मणिपुरी रास, सत्रिया, वांगला और अन्य पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए गए, तो पूरा परिसर कदमताल करने लगा। रंग-बिरंगे परिधानों और लयबद्ध कदमों ने ऐसा परिवेश बना दिया कि मानो पूरा वातावरण पूर्वोत्तर की जीवंत आबोहवा में तब्दील हो गया हो।
इस महोत्सव के मुख्य अतिथि छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह ने उत्सव पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ‘हमारा पूर्वोत्तर हमारा गौरव’ है। इस मौके पर छात्र अधिष्ठाता ने पूर्वोत्तर से जुड़ी अपनी यादों को साझा किया। साथ ही उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए सरदार पटेल छात्रावास के संरक्षक डॉ धीरेंद्र राय व डॉ शैलेंद्र कुमार को बधाई प्रेषित की।
इस अवसर पर भारत वैभव के संयोजक डॉ. धीरेंद्र कुमार राय ने कहा कि सरदार पटेल की 150वीं जन्म जयंती के निमित्त यह उत्सव काशी हिंदू विश्वविद्यालय की कार्यांजलि है। उन्होंने कहा कि एकता की भावना को समर्पित राष्ट्र मुकुट सरदार पटेल के उन महनीय योगदानों को संपूर्ण राष्ट्र की कलाधर्मिता के द्वारा ही आगे बढ़ाया जा सकता है। डॉ. राय ने आगे कहा कि इस कड़ी में भारत के सांस्कृतिक वैविध्य से परिपूरित “पूर्वोत्तर” के राज्यों से आने वाले विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा, उनके लोक नृत्य, संगीत और कला के विविध प्रकल्पों की प्रस्तुति से विश्वविद्यालय परिवार आनंदित हो उठा है। उन्होंने यह बताया कि एकवर्षीय राष्ट्रीय उत्सव की इस कड़ी में यह पहला कार्यक्रम है जो भारत की लोक संस्कृति को समर्पित है। देश की संस्कृति, भारतीय ज्ञान परम्परा, व विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों के सोपान चढ़ता हुआ यह एकवर्षीय उत्सव इस वर्ष 31 अक्टूबर तक चलेगा।
भारत वैभव के सह–संयोजक डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि यह आयोजन पूर्वोत्तर भारतीय भूभाग की संस्कृति, धर्म समृद्ध लोक परंपराओं, कला, संगीत और वेशभूषा को मुख्यधारा से जोड़कर पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करता है। डॉ. सिंह ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों के विद्यार्थियों को एक मंच पर लाकर आपसी समझ, संवाद और भाईचारे को मजबूत करने वाला है।
यह हमें बोध कराता है कि विविधता में ही भारत की वास्तविक शक्ति और सौंदर्य निहित है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक सहभागिता के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, अखंडता और परस्पर सम्मान की भावना विकसित होती है।
“भारत वैभव” के अंतर्गत यह उत्सव युवाओं को साझा विरासत पर गर्व करना और ‘एक भारत–श्रेष्ठ’ भारत के संकल्प को जीना सिखाता है।
क्रिस्टीना दर्जी, सांस्कृतिक सचिव, नॉर्थ–ईस्ट स्टूडेंट्स सोसायटी ने कहा कि सात बहन और एक भाई का नॉर्थ–ईस्ट समूह भारत का हार्टलैंड है। साथ ही कार्यक्रम के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह लोक का उत्सव है जहां संगीत, नृत्य और विभिन्न प्रस्तुति से लोक का जश्न मनाया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान असम के लोकप्रिय गायक ज़ुबिन गर्ग को उनकी गीतों के जरिये श्रद्धांजलि दी गई। उनकी गीतों की गूंज ने माहौल को और भावनात्मक बना दिया। जैसे ही “माया माया…” और “जोनाकी राटी…” की पंक्तियाँ गूंजी दर्शक खुद को झूमने से रोक नहीं पाए। कई विद्यार्थियों ने कहा कि उन्हें ऐसा लगा मानो वे पूर्वोत्तर राज्यों की गलियों में पहुंच गए हों।
नॉर्थ-ईस्ट थीम पर सजे फूड और आर्ट स्टॉल्स भी खास आकर्षण का केंद्र रहे। पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेते हुए और हस्तशिल्प को निहारते हुए लोगों ने जमकर स्वाद लिया, खरीदारी की, तस्वीरें लीं और खुशी जाहिर की।
कार्यक्रम में स्वागत वक्तव्य हाराकांतो पाएंग तथा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन संघमित्रा ने दिया। वहीं कार्यक्रम का संचालन अरबिंद विजय और मालविका जैशी ने किया।


















