नई दिल्ली

पिछड़े वर्ग की उपेक्षा से राहुल का ’’मिशन’’ कैसे होगा सफल?

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पिछड़े वर्ग की उपेक्षा से राहुल का ’’मिशन’’ कैसे होगा सफल?

  • स्थानीय नेताओं को नजरंदाज कर बाहरी प्रत्याशियों पर दांव पड़ सकता है भारी
    रितेश सिन्हा। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ओबीसी की जातिगत गणना, उनका आरक्षण और उनकी भागीदारी के मुद्दे को देशव्यापी मुद्दा बनाने के प्रयास को मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए जारी पहली सूची ने पलीता लगा दिया। कांग्रेस ने नवरात्र के पहले दिन मध्यप्रदेश के लिए 144 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की। इस सूची में 52 फीसदी आबादी वाले ओबीसी समुदाय के 38 सीटें, 4 प्रतिशत राजपूत बिरादरी को 22 सीटें, 10 प्रतिशत ब्राह्मण समुदाय से 19 सीटें, जैन समुदाय को 4, कायस्थ को 2, वैश्य को 1, सिंधी समुदाय को 2, मुस्लिम समुदाय को 1 सीट दी गई है। अनुसूचित जाति के 22 और अनुसूचित जनजाति के 23 उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा गया है। निर्दलीय विधायक केदार डाबर को टिकट देने के साथ 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार का कारण बने 3 निर्दलीय प्रत्याशियों पर भी दांव लगाया गया है। पहली सूची तो देखने के बाद साफ प्रतीत होता है कि स्थानीय नेताओं को नजरंदाज कर बाहरी प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी गई है। टिकट बंटवारे के समय स्थानीय समीकरण, जातिगत समीकरणों को नजरंदाज किया गया है।
    पूर्व मुख्यमंत्री व पार्टी नेता कमलनाथ का कहना है कि 230 सीटों के लिए लगभग 4000 लोगों ने टिकट के लिए आवेदन किया था। पहली सूची में विंध्य क्षेत्र की अनेक टिकटार्थियों की घोषणा होनी बाकी है। अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित 47 सीटों में से 30 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की गई है जिसमें मनावर के विधायक डॉ. हिरालाल अलावा का नाम इस सूची में शामिल नहीं है। पहली सूची के बाद मध्य प्रदेश के स्थानीय नेताओं की नाराजगी खुल कर नजर आने लगी है। दिल्ली के अकबर रोड स्थित पार्टी मुख्यालय में दतिया क्षेत्र के 300 से अधिक कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। दतिया विधानसभा क्षेत्र से राजेंद्र भाटिया का टिकट काटकर अवधेश नायक को टिकट दिया गया है। अवधेश नायक पिछले 25 साल से भाजपा-संघ के सक्रिय सदस्य रहे हैं। ऐसे में स्थानीय नेताओं रोष प्रकट करते हुए उनके टिकट बदले जाने की मांग की है।
    कांग्रेस ने जिन 20 सीटों पर नए चेहरों पर दांव लगाया है उनमें मेहगांव से नेता प्रतिपक्ष डा.गोविंद सिंह के भांजे राहुल भदौरिया, पिछोर से शैलेंद्र सिंह, बमोरी से ऋषि अग्रवाल, बिजावर से चरण सिंह यादव, हटा से प्रदीप खटीक, अनूपपुर से पूर्व आईएस रहे रमेश सिंह, मलहरा से साध्वी रामसिया भारती, सिहोरा से एकता ठाकुर, सिवनी से आनंद पंजवानी, घोड़ाडोंगरी से राहुल उइके, शमशाबाद से सिंधु विक्रम सिंह, अशोक नगर हरिबाबू राय, नरेला से मनोज शुक्ला, बुदनी से विक्रम मस्ताल, सीहोर से शशांक सक्सेना, आष्टा से कमल चौहान, बड़वाह नरेंद्र पटेल, इंदौर दो चिंतामणि चौकसे, इंदौर चार से राजा मंगवानी और मंदसौर से विपिन जैन के नाम प्रमुख हैं। अधिकतर प्रत्याशी कमलनाथ-दिग्विजय कैंप के बताए जा रहे हैं।
    कांग्रेस और भाजपा दोनों ही राजनीतिक दल सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण की बात जोर-शोर से उठा रही हैं। बिहार में जातिगत जनगणना होने के बाद कांग्रेसी नेताओं ने संसद और विधानसभाओं में ओबीसी महिलाओं को आरक्षण देने की बात कही है। खास बात है कि ओबीसी की सियासत को देखते हुए खुद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पत्रकार वार्ता में मौजूद पत्रकारों से हाथ उठाने को कहा जो ओबीसी समुदाय से आते हैं। दुर्भाग्य देखिए उस पत्रकार वार्ता में ओबीसी समुदाय के अनेक पत्रकार मौजूद थे, मगर किसी ने हाथ उठाने की जहमत नहीं उठाई। उसके बाद कांग्रेस के नेताओं ने जमकर खिल्ली उड़ाईं। सवाल ये उठता है कि जब कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी मध्य प्रदेश में ओबीसी समुदाय के लोगों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है तो क्या राहुल गांधी पत्रकार वार्ता की तर्ज पर इन नेताओं की जवाबदेही भी तय करेंगे। वर्तमान समय में ऐसा प्रतीत होता नहीं दिखाई दे रहा है।
    कांग्रेस के मुकाबले तो भाजपा ने ओबीसी मामले में उसकी हवा निकाल दी है। भाजपा के द्वारा जारी किए गए चार सूचियों में लगभग 29 प्रतिशत उम्मीदवार ओबीसी समुदाय के उतारे गए हैं। अब तक 136 उम्मीदवारों की सूची में 40 उम्मीदवार ओबीसी समुदाय से आते हैं। भाजपा ने 16 महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है, 28 युवा चेहरों पर पार्टी ने दांव लगाया है। अनुसूचित जाति के 18, अनुसूचित जनजाति के 30 उम्मीदवार उतारे गए हैं। भाजपा की सूची में 24 मंत्री, केंद्रीय मंत्रियों सहित 7 सांसदों को टिकट शामिल किया गया है। 57 विधायकों को भी टिकट दिए गए हैं। जबकि कांग्रेस द्वारा जारी किए गए 144 सीटों की पहली सूची में 16 टिकट महिलाओं को दिए गए हैं, यानी लगभग 12 प्रतिशत।
    राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के ब्यौहारी में कहा कि छत्तीसगढ़, कर्नाटक और राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने जनगणना का काम शुरू कर चुकी है और जिन प्रदेशों में कांग्रेस सरकारें बनेंगी वहां भी जातिगत जनगणना का कार्य जोर-शोर से किया जाएगा। राहुल ने यहां तक कहा कि कांग्रेस अब केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना के लिए मजबूर कर देगी। कांग्रेस संगठन से लेकर विधानसभा चुनाव तक जिस प्रकार से ओबीसी समुदाय, महिलाओं और अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी के नाम पर केवल खानापूर्ति का काम किया जा रहा है, उससे तो साफ लगता है कि कांग्रेसी नेताओं ने राहुल गांधी के ओबीसी/महिला कार्ड की हवा निकाल दी है। राजनीतिक विश्लेषकों की इस बात पर विशेष नजर है कि आने वाली सूची में कितनी सीटें ओबीसी, महिला और पिछड़ी जातियों को दी जाती है या फिर ये घोषणाएं कागजों तक ही सीमित होकर रह जाती है।
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