बैंगलूरु-कर्नाटक

डा.अब्दुल क़दीर मुल्क में तालीमी बेदारी के आइकॉन

दिल्ली-आयान शादाब

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डा.अब्दुल क़दीर मुल्क की एक ऐसी मशहूर-ओ-मारूफ शख्सियत हैं जिनकी मेहनत और जज़्बे से “शाहीन ग्रुप ऑफ इंस्टीटूशन्स” के फाउंडर का‌ नाम मुल्क में तालीमी बेदारी के आइकॉन के तौर पर लिया जाता है, और उनके तालीमी इदारे “ का नाम दुनिया भर में बेहतरीन तालीम और कोचिंग के लिए जाना जाता है
डॉ. अब्दुल क़दीर एक इंजिनियर हैं, मगर इन्होने मुल्क में तालीमी बेदारी के साथ साथ एक नेक इंसान बनाने की मुहीम के लिए काम करने का फैसला लिया, और 1989 में एक छोटे से कमरे में 17 स्टूडेंट्स के साथ कोचिंग इंस्टिट्यूट की शुरुआत की, आज इस इंस्टिट्यूट के अंतर्गत 16 प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज और 9 कॉलेज चल रहें हैं साथ ही एक डिग्री कॉलेज भी चलाया जा रहा हैं जिसकी ब्रांच बंगलौर और मैसूर में है।
डॉ. अब्दुल क़दीर का कहना है कि आजकल लोग अपने लिए बड़े बड़े मकान तामीर कर रहे हैं, और इस तामीर पर दिल खोलकर खर्च कर रहे हैं, मगर लोग अपनी नस्ल की तामीर के लिए बिलकुल भी फिक्रमंद नहीं हैं, जबकि नस्ल की तामीर मकान की तामीर से ज़्यादा अहम् है, उनका कहना था कि एक बच्चे/बच्ची को पढ़ाया तो समझिये कि एक नस्ल को शिक्षित कर दिया
शाहीन ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूट के अंतर्गत के.जी से लेकर ग्रेजुएशन तक की शिक्षा के साथ साथ प्रोफेशनल कोर्सेज की कोचिंग भी दी जाती है। शाहीन इंस्टिट्यूट के 900 स्टूडेंट्स ने MBBS में सफलता हासिल कर एक रिकॉर्ड बनाया है।
डॉ. अब्दुल क़दीर का कहना है कि हमारे लिए एक एक बच्चा क़ीमती है, तालीम से कोई बच्चा या बच्ची महरूम ना इसके लिए उन्होंने स्कालरशिप प्रोग्राम्स चला रखे हैं। शाहीन इंस्टिट्यूट में न सिर्फ प्रोफेशनल कोर्सेज के लिए कोचिंग दी जाती है, बल्कि स्कूल्स में उन्हें तालीम के साथ एक नेक इंसान और सभ्य नागरिक, आज्ञाकारी संतान बनाने पर भी ज़ोर दिया जाता है,
आज उनके इंस्टिट्यूट में 25 राज्यों के बच्चे मेडिकल कोचिंग के लिए प्रवेश लेने आते हैं और साथ ही विदेशों से भी लोग अपने बच्चों को पढ़ने और मेडिकल और इंजीनियरिंग की कोचिंग के लिए भेजते हैं। हर साल 200 से ज़्यादा मेडिकल स्टूडेंट्स सफल होकर सरकारी कॉलेजेज़ में सीट हासिल करते हैं,
“शाहीन ग्रुप ऑफ इंस्टीटूशन्स” में ही ‘हिफज़ुल क़ुरआन’ का एक अलग ही तीन चार तरह के कोर्सेज भी शुरू किये हुए है, इसके अलावा वो मुल्क के तमाम हुफ़्फ़ाज़ (हाफिजों) के लिए B A Bsc ,और प्रोफेशनल कोर्सेज भी शुरू किये हुए हैं, साथ ही इन्हे कोर्सेज ख़त्म करने के बाद प्लेसमेंट में भी पूरी मदद की जाती है। डॉ. अब्दुल क़दीर साहब को शिक्षा और निस्वार्थ समाज सेवा के लिए प्रतिष्ठित ‘गुरुकुल अवार्ड’, टीचिंग रत्न प्रशस्ति पत्र, और ‘डॉ. मुलताज खान अवार्ड’ के साथ साथ कर्नाटक उर्दू अकादमी से भी पुरस्कार दिए जा चुके हैं। डॉ. अब्दुल क़दीर और उनके जज़्बे के लिए
तू शाहीन है , परवाज़ है काम तेरा
तेरे सामने आसमां और भी हैं।

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