करनाल-हरियाणा

टीबी रोगियों का उपचार कर उनकी संख्या को 80 प्रतिशत तक कम किए जाने का लक्ष्य

WhatsApp Image 2026-04-18 at 09.08.39
previous arrow
next arrow

सुमरिन योगी

वर्ष 2025 तक राष्ट्रीय टीबी उन्नमूलन कार्यक्रम के तहत जिला में टीबी रोगियों की संख्या 80 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य करेंगे हासिल, सम्भावित टीबी रोगियों की जांच का दायरा बढ़ाने के साथ-साथ डॉक्टर, लैब और अन्य स्टाफ को देंगे प्रशिक्षण, सभी नामित सूक्ष्म केन्द्र होंगे क्रियाशील-अनीश यादव, उपायुक्त।

करनाल 20 जुलाई, उपायुक्त अनीश यादव ने कहा कि वर्ष 2025 तक प्रधानमंत्री के टीबी उन्नमूलन कार्यक्रम के तहत जिला में टीबी रोगियों का उपचार कर उनकी संख्या को 80 प्रतिशत तक कम किए जाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। इसके लिए सम्भावित टीबी रोगियों की जांच का दायरा बढ़ाएंगे और जांच करने वाले डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उनके प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जाएगा। उपायुक्त बुधवार को लघु सचिवालय के सभागार में, नेशनल टैक्नीकल एक्सपर्ट ग्रुप की टीम के साथ इस विषय पर चर्चा कर रहे थे। यह टीम संयुक्त सहायक पर्यवेक्षण मिशन 2022 के तहत करनाल में तीन दिवसीय दौरे पर आई थी।
उन्होंने कहा कि जिला में टीबी की जांच करने के लिए पीएचसी, जिला अस्पताल और केसीजीएमसी में 15 नामित सूक्ष्म केन्द्र यानि डैजीगनेटिड माईक्रोस्कोपिक सेंटर हैं, इनमें से 9 कार्यशील हैं, शेष 6 को अगले 15 दिनो में फंक्शनल कर दिया जाएगा। सभी जगह लैब टैक्नीशियन होंगे और इससे टैस्टों की संख्या बढ़ेगी। रोजाना किए गए टैस्ट, मरीजों की संख्या और उनके उपचार का डाटा राष्ट्रीय निक्ष्य पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि टीबी एक जानलेवा बीमारी है, लेकिन स्वास्थ्य केन्द्रों में इसका ईलाज सम्भव है। टीबी के सम्भावित रोगियों का पता लगाने के लिए जिला में जागरूकता अभियान में ओर तेजी लाई जाएगी। स्कूल, कॉलेज व उद्योगों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी रोगियों के लक्षण देखकर उनका पता लगाने की गतिविधियां भी जारी रहेंगी। उन्होंने मीटिंग में मौजूद सिविल सर्जन डॉ. योगेश शर्मा से कहा कि वे टीबी की जांच करने वाले डॉक्टरों और आशा वर्करों जैसे स्टाफ की ट्रेनिंग का शैड्यूल बनाएं। प्रत्येक प्राईमरी हैल्थ सेंटर पर सैम्पल एकत्र करने की सुविधा हो।
टीबी उन्नमूलन के लिए हिमाचल मॉडल पर काम करेंगे- उपायुक्त ने कहा कि देश में टीबी उन्नमूलन के लिए हिमाचल प्रदेश मॉडल सबसे अच्छा बताया गया है, उसका अध्ययन करके करनाल में भी उसे लागू किया जाएगा। बता दें कि हिमाचल प्रदेश में टीबी उन्नमूलन कार्यक्रम को शत प्रतिशत रूप से सफल बनाने के लिए आशावर्कर घर-घर जाकर टीबी रोगियों के लक्षण देखकर उनकी रिपोर्ट तैयार करती हैं, जिससे सम्भावित रोगी टैस्ट के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों में जाते हैं और फिर उनका उपचार होता है।
मीटिंग में टीबी उन्नमूलन की जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ. स्नेहा ने बताया कि करनाल जिला में वर्ष 2022 के दौरान बीती तिमाही में टीबी नोटिफिकेशन के 2500 के लक्ष्य के स्वरूप 2488 यानि 99.5 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। इसके तहत एफ.एल.पी.ए. और एस.एल.पी.ए. (दवा संवेदनशीलता के लिए उन्नत प्रशिक्षण) के साथ-साथ कार्यात्मक आई.आर.एल. यानि इंटरमीडिएट रेफरल लैब में सैम्पलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। वर्तमान में इस लैब में 11 जिलों के सैम्पल टैस्टिंग के लिए आते हैं। अब इसे केसीजीएमसी परिसर से सेक्टर-16 स्थित पोलीक्लीनिक सेंटर में स्थापित किया गया है। डॉ. स्नेहा ने बताया कि इसके अलावा टीबी उन्नमूलन के लिए जिला में गठित कोर कमेटी की सभाएं नियमित रूप से की जा रही हैं। स्कूल, कॉलेज और औद्योगिक यूनिटों में जाकर जागरूकता कार्यक्रम के साथ-साथ सम्भावित रोगियों के सैम्पल लिए जा रहे हैं। हर मरीज निक्ष्य पोर्टल पर रजिस्टर्ड किया जा रहा है। ईलाजरत ऐसे रोगियों को सरकार की ओर से 500 रूपये महीना पौषक आहार के लिए दिए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय टीबी उन्नमूलन कार्यक्रम की ज्वाईंट सुपोर्टिंग सुपरविजन टीम की प्रोफेसर व प्रमुख डॉ. अमिता जोशी ने उपायुक्त को बताया कि उनकी टीम ने करनाल में टीबी उन्नमूलन के लिए क्या-क्या कार्यक्रम किए जा रहे हैं, इसके लिए तीन दिवसीय दौरा किया। आज ऑब्जर्वेशन के बाद टीम के मेम्बर पंचकुला के लिए रूकसत करेंगे। उन्होंने बताया कि दौरे में टीम के सदस्यों ने टीबी जांच प्रयोगशालाओं के साथ-साथ ड्रग स्टोर की भी चैकिंग की। इस दौरान आईएमए की करनाल शाखा के प्राईवेट डॉक्टरों से भी भेंट की गई और टीबी उन्नमूलन के लिए उनके द्वारा की जा रही गतिविधियों की जानकारी ली। टीम अब तक प्रदेश के हिसार, नूहं, रोहतक और करनाल का दौरा कर चुकी है, यहां से पंचकुला का दौरा कर राज्य स्तर पर ऑब्जर्वेशन देगी। टीम में मुम्बई के माईक्रो बायोलोजिस्ट मेडिकल कंसल्टेंट, डाटा विश£ेषक, चिकित्सा सलाहकार तथा राज्य टीबी प्रकोष्ठ के तकनीकी अधिकारी शामिल हैं।
प्रोफेसर डॉ. अमिता जोशी ने मीटिंग में उपायुक्त के साथ करनाल से सम्बंधित टीबी नोटिफिकेशन की प्रैक्टेसिस और चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने सुझाव दिया कि करनाल में टीबी उन्नमूलन कार्यक्रम को ओर बेहतर बनाने के लिए मैन पावर को बढ़ाए जाने की जरूरत है तथा डैजिगनेटिड माईक्रोस्कोपिक सेंटरों की संख्या भी बढऩी चाहिए। एनटीईपी में रिक्त पदों के साथ-साथ सामान्य स्वास्थ्य प्रणाली की भागीदारी को बढ़ाया जाए। मेडिकल कॉलेज में डीआरटीबी वार्ड भी सुचारू रूप से काम करे।
मीटिंग में सिविल सर्जन डॉ. योगेश शर्मा और टीबी उन्नमूलन कार्यक्रम की डिप्टी सीएमओ डॉ. सिम्मी कपूर भी मौजूद रही।

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button