आपदा एक अप्रत्याशित स्थिति इससे निपटने के लिए विशेष दृष्टिकोण एवं रणनीति चाहिए-कुलपति प्रोफेसर अजमेर सिंह मलिक

करनाल 20 जुलाई, हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेड़ी द्वारा आपदा जोखिम के एकीकरण व न्यूनीकरण में ग्राम पंचायत विकास योजना भूमिका पर एक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम के समापन पर चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा के कुलपति प्रोफेसर अजमेर सिंह मलिक ने बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आपदा एक अप्रत्याशित स्थिति हो सकती है, इसलिए इससे निपटने के लिए विशेष दृष्टिकोण एवं रणनीति चाहिए। प्रोफेसर मलिक ने बताया कि आपदा जोखिम प्रबंधन की विभिन्न गतिविधियों से संबंधित जानकारी और जागरूकता फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं व पंचायती राज संस्थाओं के पदाधिकारियों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। अंत में उन्होंने प्रशिक्षण के प्रतिभागियों को आपदा प्रबंधन पर ध्यान और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। इस कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रोफेसर कमलदीप सांगवान की देखरेख में पूरा हुआ जिसमें हरियाणा राज्य की विभिन्न जिला परिषदों से 53 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ कृष्ण कुमार ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए प्रतिभागियों को आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर ध्यानवर्धन किया। उन्होंने आपदा प्रबंधन की नई उभरती चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया, जिन्हें आपदा की तैयारी और रोकथाम के लिए अपनाने की जरूरत है।
प्रोफेसर मलिक ने संस्थान द्वारा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं एवं हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सदस्यों के लिए आयोजित एक अन्य पांच दिवसीय कार्यशाला का भी दौरा किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य हरियाणा राज्य के स्वयं सहायता समूह को मजबूत एवं उन्हें एक रोल मॉडल के रूप में विकसित करना है। इस कार्यशाला में महिला उद्यमियों के लिए एक सक्षम वातावरण बनाने के लिए प्रेरित किया गया ताकि वे राज्य के आर्थिक विकास में सक्रिय रूप से योगदान दे सकें और सभी महिलाएं सामाजिक रूप से सशक्त बन सके। इस कार्यशाला का संचालन डॉक्टर सुशील मेहता व विशाल सिंह रघुवंशी महिला सशक्तिकरण विशेषज्ञ की देखरेख में पूरा हुआ जिसमें हरियाणा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के स्वयं सहायता समूह से 34 महिला प्रतिभागियों ने भाग लिया। इन सभी के अलावा डॉ वजीर सिंह नीलम शिकारा एवं पुनीत देवराज अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।


















