एसआई परीक्षा के प्रश्न मे पंडित’ शब्द के प्रयोग पर बवाल,दीवानी कचहरी में अधिवक्ताओं का जोरदार प्रदर्शन

‘पंडित’ शब्द पर विवाद,ब्राह्मण समाज ने जताई कड़ी आपत्ति ||
ब्राह्मण समाज के अपमान के विरोध मे अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश,निष्पक्ष जांच की मांग ||
प्रश्नपत्र में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ वाराणसी में विरोध तेज ||
जातिगत टिप्पणी को लेकर अधिवक्ताओं का आक्रोश,सरकार से कार्रवाई की मांग ||
एसआई भर्ती परीक्षा विवाद आपत्तिजनक प्रश्न पर उग्र आंदोलन की चेतावनी ||
वाराणसी:- दीवानी कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं और प्रबुद्ध समाज के सदस्यों ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में ब्राह्मण समाज के प्रति कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के विरुद्ध अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया | इस अवसर पर दीवानी कचहरी में पिछले पांच वर्षों से वकालत कर रहे युवा अधिवक्ता ने मीडिया को संबोधित करते हुए अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की | समाजवादी अधिवक्ता सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष अधिवक्ता आलोक सौरभ पांडेय ने कहा कि किसी भी व्यक्ति विशेष या जाति को लक्षित करना न केवल संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है बल्कि सामाजिक समरसता के लिए भी घातक है उन्होंने जोर देकर कहा कि “ब्राह्मण हमेशा से पूजनीय रहा है हमारे इतिहास और परंपराओं में ब्राह्मण और पंडित को एक विद्वान श्रेणी के रूप में देखा जाता है किसी विद्वान व्यक्ति या समाज पर इस प्रकार का लांछन लगाना अत्यंत निंदनीय है |
प्रदर्शनकारियों ने इसे एक गहरी साजिश करार देते हुए कहा कि आयोग द्वारा इस प्रकार के प्रश्न शामिल करना समाज में जातिगत विद्वेष फैलाने का प्रयास है |अधिवक्ताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जाति-बिरादरी पर विवाद दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है और सरकार इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है |
मुख्य बिंदु–
(1)- विवाद का कारण-
हाल ही में 14 और 15 मार्च को आयोजित एसआइ भर्ती परीक्षा में एक प्रश्न पूछा गया था अवसर पर बदल जाने वाले व्यक्ति को क्या कहते हैं?”आरोप है कि इस प्रश्न के विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द को भी शामिल किया गया था जिसे प्रदर्शनकारियों ने एक विशिष्ट जाति का अपमान और समाज में गलत संदेश देने वाला बताया है |
(2)- प्रशासनिक हस्तक्षेप-
विरोध प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित लोगों ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड और संबंधित विभाग का पुतला दहन करने की कोशिश की जिसे मौके पर मौजूद पुलिस बल ने समय रहते रोक दिया पुलिस की मुस्तैदी के कारण प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हुआ |
ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि–
(1)- जातिगत विद्वेष को बढ़ावा देने वाले ऐसे प्रश्न तैयार करने वाले अधिकारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाए |
(2)- भविष्य में परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों की गहन जांच की जाए ताकि किसी की धार्मिक या जातीय भावनाओं को ठेस न पहुंचे |
(3)- राज्य सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराए |
(4)- संबंधित आयोग के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए |
(5)- भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो,इसके लिए ठोस गाइडलाइन बनाई जाए |
(6)- समाज में विद्वेष फैलाने वाले तत्वों को चिह्नित कर कड़ी सजा दी जाए |
समाजवादी अधिवक्ता सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष अधिवक्ता आलोक सौरभ पांडेय ने अंत में दोहराया कि ब्राह्मण समाज का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई और इस अपमानजनक प्रश्न को लेकर उचित कदम नहीं उठाए गए तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करेंगे | फिलहाल पुलिस की मौजूदगी में ज्ञापन सौंपने के बाद विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया है |
समाजवादी अधिवक्ता सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष आलोक सौरभ पांडेय,आकाश पांडेय,अंकित दुबे, आर्यन पांडेय,श्रीपति मिश्र,रमेंद्र नारायण मिश्र,विकास सहित दर्जनों लोग रहे ||




























