इफको करनाल द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र (राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान) करनाल के सभागार में नैनो उर्वरक जागरुकता अभियान के अन्तर्गत सहकारी कार्यकर्त्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

सुमरीन योगी
करनाल
इफको करनाल द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र (राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान) करनाल के सभागार में नैनो उर्वरक जागरुकता अभियान के अन्तर्गत सहकारी कार्यकर्त्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।



करनाल, 15 सितम्बर। इफको करनाल द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र (राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान) करनाल के सभागार में नैनो उर्वरक जागरुकता अभियान के अन्तर्गत सहकारी कार्यकर्त्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर कृषि विभाग से डा. सुनील बजाड, गुणवता नियंत्रक निरीक्षक, करनाल कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि तथा कृषि विज्ञान केन्द्र से डा. मनीष कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रुप में शामिल हुए।
कार्यक्रम में डॉ. निरंजन सिंह, वरिष्ठ क्षेत्र प्रबंधक इफको करनाल, श्री विनय मणी, जेड.एम.ई. इफको – एम.सी., श्री महेश यादव, आर.एम.ई. इफको – एम.सी. हरियाणा, श्री मोहित ढूकिया, क्षेत्र अधिकारी इफको करनाल, समेत 25 से अधिक पैक्स प्रबन्धकों ने भाग लिया। डॉ. निरंजन सिंह ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए भागीदारों का स्वागत किया व बताया कि इफको द्वारा सहकारी समितियों के प्रबन्धकोंध्विक्रेताओं को कृषि से सम्बन्धित आधुनिक जानकारी देने व कृषि आदानों की बिक्री की योजना बताने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इफको द्वारा विश्व में सबसे पहले परम्परागत रासायनिक खादों के विकल्प के तौर पर तैयार किए गए नैनो उर्वरक के कृषि में महत्त्व के बारे में सहकारी कार्यकर्त्ताओं को जागरुक करने को इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बताया। उन्होने बताया कि नैनो यूरिया इफको द्वारा एक नई खोज है जिससे किसानों की आमदनी दोगुनी करने में मदद मिलेगी। नैनो यूरिया की 500 एम एल की एक बोतल दानेदार यूरिया के एक बोरे (45 किलो) के बराबर कार्य करती है। और ये भी कहा कि क्योंकि इसका प्रयोग फसलों पर स्प्रे के रूप में किया जाता है, इसलिए इसकी प्रयोग क्षमता परम्परागत यूरिया से अधिक है। पौधे पत्तों व तने के माध्यम से इसको अवशोषित कर लेते हैं। यूरिया की तरह नैनो यूरिया भूमिगत जल, जमीन व वातावरण को प्रदूषित नहीं करता है।
उन्होने नैनो डीएपी पर चर्चा करते हुए बताया की नैनो डीएपी भी नैनों तकनीकी पर आधारित है व इसकी 500 मी ली की आधी बोतल को बीज उपचार/जड़ उपचार/कंद उपचार बिजाइ के समय करंे व आधी बोतल 30-35 दिन को फसल पर 125 लीटर पानी में स्प्रे करकर उपयोग करें। इसके उपरांत श्री महेश यादव जी ने खरीफ सीजन की फसल में आने वाले बीमारियों व कीटों के बारे चर्चा की व इनके प्रबंधन पर भी विस्तार से चर्चा की। इसके उपरांत डा. सुनील बजाड ने कृषि विभाग द्वारा किसानों के हित के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे मै जानकारी दी।
उन्होंने प्रबन्धकों को समय पर खाद के लाइसेंस का नवीनीकरण करवाने की सलाह दी व पराली प्रबंधन हेतु विभाग द्वारा की जा रही विभिन कार्रवाई पर विस्तार से चर्चा की। डा. मनीष ने कृषि ड्रोन पर अपने अनुभव सांझा किये। श्री मोहित ढूकिया ने मृदा का स्वास्थ्य बढ़ाने हेतु उपयोग होने वाले विभिन उत्पादों पर विस्तार से चर्चा की। श्री विनय मणी जी ने इफको – एम.सी. की आगामी भविष्य की गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के अंत में पैक्स कर्मचारियों के सामने आने वाली विभिन्न समस्यायों पर चर्चा की गई।


















