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स्योहारा में कुत्तों का राज, नगर पालिका मौन-व्रत पर-क्या नगर पालिका स्योहारा को किसी बड़ी अनहोनी का इंतज़ार है

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अब बड़ा सवाल यह है—
क्या नगर पालिका स्योहारा किसी बड़ी अनहोनी के इंतज़ार में है

स्योहारा में कुत्तों का राज, नगर पालिका मौन-व्रत पर
हिंदू चौधरियान में आवारा आतंक, घायल युवक से ज्यादा सक्रिय रही अफ़वाह मशीन
स्योहारा
नगर पालिका स्योहारा शायद इस भ्रम में है कि शहर में आवारा कुत्ते नहीं, बल्कि “नगर भ्रमण योजना” के तहत खुले घूमते चार-पैरों वाले कर्मचारी हैं। तभी तो हिंदू चौधरियान मोहल्ले में लगातार बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों के बावजूद पालिका की नींद आज तक नहीं टूटी।
ताज़ा मामला मंगलवार शाम का है, जब मोहम्मद आमिर पुत्र अशरफ़ अली अपने काम से घर लौट रहे थे। जैसे ही वे किराना स्टोर के सामने पहुँचे, पीछे से एक आवारा कुत्ते ने अचानक हमला कर दिया। परिणाम— युवक गंभीर रूप से घायल, मोहल्ले में दहशत और नगर पालिका… हमेशा की तरह नदारद।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है। दर्जनों लोग पहले भी आवारा कुत्तों का शिकार हो चुके हैं, लेकिन हर बार नगर पालिका की प्रतिक्रिया वही—
“देख रहे हैं”
“प्रस्ताव भेजा गया है”
“जल्द कार्रवाई होगी”
कार्रवाई कब होगी, यह सवाल शायद किसी अगली काटी हुई टांग या हाथ के बाद ही तय होगा।
घायल युवक को परिजनों द्वारा तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने रेबीज का इंजेक्शन लगाया। चिकित्सकीय उपचार तो समय पर हो गया, लेकिन सवाल यह है कि क्या नगर पालिका की ज़िम्मेदारी भी इंजेक्शन लगवाकर टाली जा सकती है?
घटना के बाद जब घायल युवक ने आत्मरक्षा में कुत्ते को भगाया, तो कुछ “घटना विशेषज्ञ” सक्रिय हो गए और मामले को दूसरा रंग देने की कोशिश भी की गई। यानी पीड़ित से ज़्यादा चिंता कुत्ते की छवि की रही, नगर पालिका की नहीं।
मोहल्लेवासियों में रोष व्याप्त है। लोगों का साफ कहना है कि अगर जल्द ही आवारा कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी और स्थायी समाधान की ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब बड़ा सवाल यह है—
क्या नगर पालिका स्योहारा किसी बडी अनहोनी के इंतज़ार में है, ताकि तब इसे “दुर्भाग्यपूर्ण घटना” बताकर फाइल बंद की जा सके?
शहर में आवारा कुत्तों का आतंक जारी है, और नगर पालिका का रवैया ऐसा मानो यह सब किसी दूसरे शहर में हो रहा हो।

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