“जब डॉक्टर बना गुंडा – लोकतंत्र का चौथा स्तंभ लहूलुहान”
“जब डॉक्टर बना गुंडा – लोकतंत्र का चौथा स्तंभ लहूलुहान”
नफरत और गुस्से से भरी इस दुनिया में एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है—जहां लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला हुआ है।
बिजनौर में अब पत्रकार भी सुरक्षित नहीं हैं। जिन डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है, वही अब गुंडों के साथ मिलकर पत्रकारों को पीट रहे हैं, कपड़े फाड़ रहे हैं और मोबाइल छीन रहे हैं। यह सब तब हो रहा है, जब देश “अच्छे दिन” के सपने देख रहा है।
लाइफ लाइन अस्पताल – नाम में ‘जीवन’, काम में ‘हिंसा’
बुधवार रात करीब 8:30 बजे, बिजनौर के लाइफ लाइन हॉस्पिटल में यह शर्मनाक घटना घटी। एक नाबालिग लड़की द्वारा मरीज को गलत कैनूला लगाए जाने की सूचना पर पत्रकार कवरेज के लिए पहुंचे थे। लेकिन अस्पताल के मुख्य चिकित्सक डॉ. चहल ने, अपने स्टाफ और गुंडों के साथ मिलकर, 15–20 पत्रकारों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, उनके कपड़े फाड़े और मोबाइल छीन लिए।
क्या यह वही लोकतंत्र है?
जहां सवाल पूछना गुनाह बन चुका है?
जहां पत्रकारिता को “चौथा स्तंभ” कहकर सिर्फ भाषण दिए जाते हैं, लेकिन असल में उस स्तंभ को गिराने की साजिश होती है?
गलती छुपाने की हिंसक कोशिश
अगर डॉक्टर को अपनी गलती का अहसास था, तो माफी मांगना चाहिए था, सुधार का वादा करना चाहिए था।
लेकिन इसके बजाय—गुंडों को बुलाकर हमला किया गया। यह सिर्फ पत्रकारों पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रीढ़ पर वार है।
पत्रकार संगठनों की चेतावनी
पत्रकार संगठनों ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और प्रशासन से डॉ. चहल पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। चेतावनी दी गई है—अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा।
आज सवाल सिर्फ एक है:
अगर खबर दिखाने वाला सुरक्षित नहीं रहेगा, तो सच कौन दिखाएगा?
अगर सवाल पूछने वाला डर जाएगा, तो जवाब कौन देगा?
और अगर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ टूट गया… तो यह इमारत कब तक खड़ी रहेगी?
आईरा न्यूज़ नेटवर्क
खबर वही, जो हो सही






