करनाल: कोविड रोगियों के टेस्ट से लेकर ईलाज तक की भागदौड़ में स्वास्थ्य विभाग प्रशासन के साथ समन्वय कर कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। अब अस्पतालों में उपचाररत मरीजों के अलावा सरकार व स्वास्थ्य विभाग होम आईसोलेटिड मरीजो की केयर पर फोकस कर रहा है, क्योंकि कुल पोजिटिव के सों में से करीब 92 प्रतिशत केस होम आईसोलेशन में है।
जबकि 8 प्रतिशत अस्पतालों में ईलाज करवा रहे है। इसे देखते प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग व प्राईवेट डॉक्टरों के संयुक्त तत्वावधान में होम केयर सिस्टम की एक नई पहल की गई है। अगले एक-दो दिन में ही इसे चालू करने की तैयारी को लेकर, शुक्रवार को लघु सचिवालय के सभागार में उपायुक्त निशांत कुमार यादव की, लाईफ केयर अस्पताल के संचालक डॉ० गगन कौशल, केसीजीएमसी के निदेशक डॉ० जगदीश दुरेजा व सिविल सर्जन डॉ० योगेश शर्मा के साथ वार्ता की गई।
कैसे काम करेगा सिस्टम: इस बारे उपायुक्त ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस, तृतीय व फाईनल ईयर के करीब 200 छात्र इस काम को करेंगे, 20 छात्रों पर एसोसिएयट प्रोफेसर रैंक का एक-एक कंस्लटेंट होगा और प्रत्येक मेडिकल छात्र को 25-25 होम आईसोलेटिड के नाम, पते व आयु की सूची दी जाएगी, जो पोर्टल पर होगी। घर पर रहकर ईलाज कर रहे ऐसे सभी पोजिटिव व्यक्तियों की सूची
केसीजीएमसी में पहले से ही मौजूद है। मेडिकल छात्र एक ऐप के जरिए प्रतिदिन 25 होम आईसोलेटिड से सम्पर्क करेगा और कॉलिंग के साथ ही पोर्टल पर उनकी बुखार, डायरिया व सांस लेने जैसी तकलीफो की जानकारी का डाटा आ जाएगा। रोगी में को-मोबिडिटी यानि शुगर हर्ट जैसी एक से अधिक बीमारियों के लिए रिमार्क स का प्रावधान रहेगा।
जैसे ही रोगी अपनी तकलीफे बताएगा, वह पोर्टल पर रेड कलर में दिखाई देगा। तकलीफे जान लेने के बाद मेडिकल छात्र अपने कंसलटेंट को बताएंगे और यादि होम आईसोलेटिड को अस्पताल में एडमिट करवाने की जरूरत होगी तो उसे एम्बुलेंस में लाकर दाखिल करवा दिया जाएगा। इस प्रक्रिया को डॉ० गगन कौशल ने एक प्रेजेन्टेशन से समझाया। उपायुक्त ने बताया कि सभी छात्र दो घंटे सुबह व दो घंटे शाम इस काम को करेंगे। इसके लिए शनिवार को मेडिकल छात्रों की एक बेसिक ट्रेनिंग का कार्यक्रम भी बना दिया है।
पंचायत भवन में होम आईसोलेटिड के लिए 100 बैड की सुविधा: उपायुक्त ने बताया कि होम आईसोलेटिड को अस्पताल में दाखिल करने के लिए शहर के पंचायत भवन में, 20 बैड का अस्पताल चालू कर दिया है, इसे अपग्रेड कर 100 का किया जा रहा है। ऐसे 50 बैड ऑक्सीजन कंस्टरेटर तथा 50 सिलेंडर पर रहेंगे। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 6 हजार में से 5800 ही आईसोलेटिड है। उन्होंने बताया कि इस सिस्टम को आगे लिंक करेंगे, जिसमें किस होम आईसोलेटिड को बैड चाहिए या किसे सिलेंडर चाहिए। इस सुविधा से अस्पतालों पर मरीजों का लोड कम होगा।
होम आईसोलेटिड को किट भी करेंगे वितरित: उपायुक्त ने बताया कि होम आईसोलेटिड को थर्मामीटर व पल्स ऑक्सीमीटर जैसी चीजों की एक-एक किट वितरित करेंगे। यह काम आशा वर्करों से करवाया जाएगा। प्रत्येक पीएचसी व सीएचसी में 500-500 किटें देंगे। मरीज के ठीक हो जाने के बाद दोबारा प्रयोग में ली जाने वाली चीजे यानि थर्मामीटर व ऑक्सीमीटर वापिस देने होंगे ताकि उन्हें अगले मरीज को दिया जा सके। उन्होंने किट के साईज और सामान को लेकर सीएमओ से कहा।
वार्ता में एसीयूटी नीरज कादियान, एसडीएम करनाल आयुष सिन्हा, सीएमओ के डॉ० अभय अग्रवाल तथा एडीआईओ परविन्द्र सिंह भी मौजूद थे।
कोविड के होम आईसोलेटिड मरीजों के लिए प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग व डॉक्टर के संयुक्त प्रयास से होम केयर सिस्टम की पहल, केसीजीएमएस में एमबीबीएस छात्र ऐप के जरिए होम आईसोलेटिड से पोर्टल पर बुखार व सांस लेने जैसी तकलीफो की लेंगे जानकारी, कंस्लटेंट सुनिश्चित करेंगे ईलाज:-डीसी निशांत कुमार यादव।


















