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बरसात के मौसम में मलेरिया व चिकिनगुनिया जैसी बीमारियों से नागरिक रखें अपना ध्यान

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करनाल – मलेरिया व डेंगू के खात्मे को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूर्ण रूप से गंभीर एवं प्रयासरत है। सरकार द्वारा भी अथक प्रयास किए जा रहे हैं। कोविड-19 जैसी जानलेवा बीमारी के साथ-साथ मलेरिया, डेंगू व चिकिनगुनिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग पैनी नजर बनाए हुए है।

इस बारे जानकारी देते हुए उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने नागरिकों से आग्रह करते हुए कहा कि वे स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें। एक जगह पर पानी को इक्_ा न होने दें। उन्होंने बताया कि मच्छर ठहरे (एकत्रित) हुए पानी मे अंडे देते हैं, जिससे मलेरिया व डेंगू की बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की बढ़ोतरी तेजी से होती है। इसलिए तुरंत प्रभाव से मलेरिया उन्मूलन की सभी टीम ठहरे हुए पानी मे काला तेल व टेमिफोस की दवाई का छिड़काव कर रहे हैं, जिससे मच्छर का लारवा खत्म हो सके और जानलेवा बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की उत्पत्ति पर पूर्ण रूप से रोक लग सके। इस संबंध में जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए है।

उपायुक्त ने बताया कि जिला में ब्रीडिंग चेकर, फील्ड वर्कर द्वारा घर-घर जाकर मलेरिया उन्मूलन संबंधि मच्छर के लारवा की ब्रीडिंग चेक की जा रही है और ब्रीडिंग पाए जाने पर तुरंत प्रभाव से टीमों द्वारा टेमिफोस की दवाई डलवाकर लारवा को नष्ट किया जा रहा है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे हर रविवार को सभी लोग ड्राइ डे (शुष्क दिवस) के रूप मे मनाएं, जिस दौरान घर के सभी कूलर व टंकियों को अच्छी तरह से कपड़े से रगड़कर साफ कर लें, फ्रिज की ट्रे का पानी जो बिजली जाने के बाद फ्रिज की बर्फ के पिघलने से ट्रे में एकत्रित होता है, उसको जरूर साफ करें।

अगर साफ करना संभव न हो तो उसमे 5 से 10 एमएल पेट्रोल या डीजल का तेल डाल सकते हैं। क्योंकि फ्रिज की ट्रे के साफ पानी में डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर की उत्पत्ति होती है। घर मे प्रयोग किए जा रहे एसी के पानी को एकत्रित न होने दें। क्योंकि एसी के साफ एकत्रित पानी में भी डेंगू फैलाने वाले मच्छर पैदा होते हैं, जिस पानी को निकालना संभव न हो उसमें काला तेल या डीजल डाल सकते हैं, जिससे मच्छरों की उत्पत्ति न हो पाए। जिले में घरो की जांच स्वास्थ्य विभाग की टीमो द्वारा की जा रही है और जिन घरो में मच्छर का लारवा मिल रहा है, उन सभी घरों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा चेतावनी संबंधित नोटिस दिए जा रहे हैं और साथ में हिदायत भी दी है कि आगे से पानी के सभी स्त्रोतों की सप्ताह में एक बार पानी को सुखाकर अच्छी प्रकार से कपडे से रगड़कर साफ करें, जिससे मच्छरों की बढ़ोत्तरी पर रोक लग सके।

उपायुक्त ने आमजन से अपील की है कि सभी को रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए व दिन के समय पूरी बाजू के कपड़े पहनने चाहिए, जिससे मच्छर के काटने से बचा जा सके। उन्होंने बताया कि मलेरिया के शुरूआती लक्षणों में तेज ठंड के साथ बुखार आना, सर दर्द होना व उल्टियों का आना है। इसलिए कोई भी बुखार आने पर अपने नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर मलेरिया की जांच करवाएं और अगर मलेरिया जांच में पाया जाता है तो उसका 14 दिन का इलाज स्वास्थ्यकर्मी की देख रेख में करे।

मलेरिया के मुख्य लक्षण:

सर्दी व कपकपी के साथ तेज बुखार का होना, सिरदर्द होना व गंभीर मामलो मे उल्टियां होना।


मलेरिया का उपचार व बचाव:

कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है, इसलिए बुखार होने पर अपने नजदीक स्वास्थ्य केन्द्र में तुरन्त रक्त की जांच कराएं। मलेरिया होने पर तुरन्त 14 दिन का पूर्ण आमूल उपचार स्वास्थ्यकर्मी की देख रेख मे लें, क्योंकि आमूल उपचार न लेने से मलेरिया बुखार बार-बार होता है। मलेरिया बुखार बार-बार होने से खून की कमी हो जाती है जोकि बहुत घातक होती है। घरों में मच्छरनाशक दवाई का छिड़काव करवाएं। मच्छरदानी का प्रयोग करें। पूरी बाजू के कपडें पहनें। घर के आस-पास पानी इक न होने दें। बरसात का मौसम शुरु होने से पहले घर के आस-पास के गड्ढïों को भर दिया जाए ताकि बरसात का पानी इक न होने पाएं, जिसमें मच्छर पनपते है।

डेंगू व चिकिनगुनिया का उपचार व बचाव:


डेंगू व चिकिनगुनिया फैलाने वाला मच्छर एडीज दिन में काटता है व रूके हुए साफ पानी में ही पनपता है।

डेंगू के लक्षण:

अकस्मात तेज बुखार का होना, आचनक तेज सिर दर्द होना, मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना, आंखों के पीछे दर्द होना, जोकि आंखों को घुमाने से बढ़ता है।

चिकिनगुनिया के लक्षण:

बुखार के साथ जोड़ों में दर्द व सूजन होना, कपकपी व ठंड के साथ बुखार का अचानक बढऩा, सिर दर्द होना।

क्या करें:

घरों के आस-पास गड्ढïों को मिट्टïी से भरवा दें। अपने कूलर, होदी या पानी से भरे हुए बर्तन सप्ताह में एक बार अवश्य खाली करें व कपड़े से अच्छी तरह से रगड़कर साफ करके प्रयोग करें। शरीर को ढक कर रखे और मच्छर रोधी दवा या क्रीम व कीटनाशक दवाई से उपचारित मच्छरदानी का उपयोग करे एवं पूरी बाजू के वस्त्र पहने। छतों पर रखी पानी की टंकियों को ढक्कन लगाकर बंद रखे। बुखार आने पर डाक्टर की सलाह अवश्य लें।

क्या न करें:

स्वयं दवा न खाएं, एसप्रीन, ब्रुफिन दवाइयो का सेवन न करें। घरो के आस-पास के गड्ढïों में 7 दिन से ज्यादा पानी इकत्रित न होने दें। पुराना सामान जैसे टायर, ट्यूब, खाली डिब्बे, पॉलिथीन के लिफाफे खुले मे न फैंके, ताकि बरसात का पानी उनमें न भरे। यदि कूलर प्रयोग में नहीं लाया जा रहा है, तो उसमे पानी इक न होने दें। हैंडपंप या नल के आस-पास पानी जमा न होने दें। टायर ट्यूब, खाली डिब्बे खुले में न छोड़े। पानी ठहरेगा जहां मच्छर पनपेगा वहां।

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