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फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत ग्रामीण स्तर का जागरूकता कार्यक्रम

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नगीना – कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा ग्राम महेश्वरी विशनोईवाला, ब्लॉक कोतवाली में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम फसल अवशेष प्रबंधन के विषय पर आयोजित किया गया। उक्त कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के इंजी एस के यादव ने सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय आधुनिक कम्प्यूटराईजड कृषि मशीनरी ‌का है, जो किसान ‌भाई वर्तमान समय के अनुसार चलेंगे व अधिक आमदनी के साथ प्रगति करेंगे। उन्होंने कम्प्यूटराईजड लेजर लेवलर की पूरी जानकारी दी। वैज्ञानिक डॉ के के सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान भाइयों अपने खेत की पराली, गन्ने की पत्तियां और अन्य अवशेष जो कृषि से निकलते हैं , उनको ना जलाएं क्योंकि इनको जलाने से हमारा वातावरण प्रदूषित होता है साथ ही साथ मृदा की उर्वरता भी कम होती जा रही है ।

वातावरण प्रदूषित होने के कारण इसका प्रभाव आम जनमानस पर पड़ता है । फसलों के अवशेषों को किसान भाई चाहे वह यांत्रिक या जैविक जो भी तरीके हो उस के माध्यम से खेत के अंदर समाहित करें, जिससे कि मृदा की उर्वरता में वृद्धि हो साथ ही साथ हमारा वातावरण भी प्रदूषित न हो। इसके साथ ही डॉ के के सिंह ने किसानों को बताया कि वर्तमान समय में हमारे जो भी किसान भाई सरसों, गेहूं की बुवाई करने जा रहे हैं वह गेहूं की बायोफोर्टीफाइड प्रजातियां प्रयोग में लाई क्योंकि यह प्रजातियां अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ इसमें हमारे शरीर के लिए आवश्यक जिंक, प्रोटीन, आयरन की मात्रा भरपूर मात्रा में मिलती है। किसान भाई गेहूं की प्रजातियों में गेहूं की डी बी डब्ल्यू 187, डी बी डब्ल्यू 303 जैसी अधिक उत्पादकता वाली प्रजातियों का प्रयोग करें। यह प्रजातियां जनपद बिजनौर में प्रति एकड़ 35 से लेकर 40 कुंतल प्रति प्रति एकड़ पैदावार देने की क्षमता रखती है। सभी किसान भाई सरसों की बुवाई कर रहे है वह सरसों की पूसा सरसों- 31 प्रजाति का प्रयोग करें क्योंकि यह प्रजाति बायोफोर्टीफाइड है

कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ राकेश कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान भाई अपने खेतों पर फसलों के अवशेषों को दबाने के लिए जो मशीनरी सरकार द्वारा अनुदान पर दी जा रही है उसका प्रयोग करें और गेहूं की बुवाई धान के कटे हुए सीधे खेत में बिना जुताई किए हुए हैप्पी सीडर जैसी मशीनरी से बुआई करें साथ ही साथ फसलों के अवशेषों को मृदा में समाहित करने के लिए मल्चर का प्रयोग करें।
प्रभारी अनुसन्धान केन्द्र नगीना डा राजेन्द्र मालिक ने किसानों को सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में किसानों के साथ हम सभी ‌की जिम्मेदारी होती है कि हम अपने पर्यावरण को बचाने में सहायक बने। उन्होंने कहा कि किसान भाई कृषि की आधुनिक तकनीकी जैसे फव्वारा सिंचाई तकनीकी का प्रयोग करें। साथ ही रवी फसलों के उत्पादन की तकनीकी बताई।

विकास अग्रवाल की रिपोर्ट

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