बिजनौर में गुलदार का आतंक: छह वर्षीय मासूम नक्श की मौत के बाद मानव सुरक्षा पर गंभीर सवाल

बिजनौर में गुलदार का आतंक: छह वर्षीय मासूम नक्श की मौत के बाद मानव सुरक्षा पर गंभीर सवाल
190 गांवों में दहशत और सैकड़ों स्थानों पर गुलदार की गतिविधियों की खबरों के बीच मानव-वन्यजीव संघर्ष पर उठे सवाल — मानवाधिकार आयोग में पहुंचा मामला
बिजनौर/नजीबाबाद। जनपद बिजनौर के नजीबाबाद क्षेत्र के ग्राम खुशहालपुर मड़का उर्फ आरफपुर खजूरी में छह वर्षीय मासूम नक्श पुत्र भूदेव कश्यप की गुलदार के हमले में हुई दर्दनाक मौत के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। स्थानीय समाचार रिपोर्ट के अनुसार बालक लापता होने के बाद रातभर तलाश किया गया और अगले दिन गांव से करीब 300 मीटर दूर खेत में उसके शरीर के अवशेष मिले।
घटना ने एक बार फिर बिजनौर में लंबे समय से जारी मानव-गुलदार संघर्ष और ग्रामीणों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

समाचार रिपोर्टों के अनुसार क्षेत्र में गुलदार की मौजूदगी पहले भी सामने आती रही थी। मुर्गी फार्म के आसपास गुलदार दिखाई देने तथा पशुशाला से बकरी उठाकर ले जाने जैसी घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों की ओर से वन विभाग से पिंजरा लगाने और निगरानी बढ़ाने की मांग किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि आबादी के आसपास गुलदार की गतिविधियों की जानकारी पहले से थी, तो बच्चों एवं ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए प्रभावी निवारक कदम कितनी गंभीरता से उठाए गए?
हाल के दिनों में बिजनौर के विभिन्न क्षेत्रों से गुलदार के आबादी में पहुंचने और ग्रामीणों में भय की खबरें लगातार सामने आई हैं। चांदपुर क्षेत्र के काजीशोरा गांव में गुलदार के आबादी में दिखाई देने की घटना भी रिपोर्ट हुई, जिसके बाद ग्रामीणों ने पिंजरा लगाने और गश्त बढ़ाने की मांग की।
इससे पहले हल्दौर क्षेत्र के करणपुर गांव में गुलदार द्वारा बाइक सवार का पीछा किए जाने का वीडियो भी सामने आया था। रिपोर्ट के अनुसार वन विभाग ने प्रभावित इलाकों में 120 से अधिक पिंजरे लगाए थे और निगरानी तथा जागरूकता अभियान चलाए जा रहे थे।
मामले को गंभीर मानवाधिकार प्रश्न मानते हुए डॉ. तारिक़ ज़की, राष्ट्रीय महासचिव, World Accreditation of Human Rights (WAOHR) ने उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की है।
आयोग ने शिकायत को डायरी संख्या 6762/IN/2026 प्रदान की है।
शिकायत में केवल नक्श की मृत्यु की जांच की मांग नहीं की गई है, बल्कि बिजनौर में मानव-गुलदार संघर्ष की व्यापक स्थिति की जांच की मांग उठाई गई है।
शिकायत में समाचार रिपोर्टों के आधार पर लगभग 190 गांवों में गुलदार की दहशत, करीब 300 स्थानों पर गतिविधियां तथा पिछले चार वर्षों में 37 मानव मौतों के प्रकाशित आंकड़ों का उल्लेख करते हुए इनके आधिकारिक सत्यापन की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने आयोग से यह जांच कराने की मांग की है कि:
नक्श की मृत्यु से पहले क्षेत्र में गुलदार की मौजूदगी की सूचना विभाग को थी या नहीं।
पूर्व सूचना मिलने पर अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की।
क्षेत्र में वन विभाग की नियमित गश्त की क्या व्यवस्था थी।
कितने पिंजरे और ट्रैप कैमरे उपलब्ध एवं सक्रिय थे।
ग्रामीणों द्वारा दी गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई।
पिछले चार वर्षों में गुलदार के हमलों से हुई मानव मौतों का आधिकारिक आंकड़ा क्या है।
यदि पूर्व सूचना के बावजूद पर्याप्त निवारक कदम नहीं उठाए गए तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही क्या बनती है
शिकायत में मृतक बालक के परिवार को राज्य सरकार की नियमानुसार राहत के अतिरिक्त ₹10 लाख की क्षतिपूर्ति प्रदान किए जाने की संस्तुति की मांग की गई है।
इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में नियमित वनकर्मी गश्त, त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था, ट्रैप कैमरे एवं ड्रोन निगरानी, स्थानीय चेतावनी प्रणाली, बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रोटोकॉल तथा मानव-गुलदार संघर्ष की रोकथाम के लिए बिजनौर की समेकित दीर्घकालीन कार्ययोजना तैयार कराने की मांग की गई है।
“नक्श की मौत को केवल एक वन्यजीव घटना मानकर मामला समाप्त न किया जाए”
शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच में यह सामने आता है कि संबंधित अधिकारियों को संभावित खतरे की पूर्व जानकारी थी और इसके बावजूद नागरिकों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त निवारक कदम नहीं उठाए गए, तो यह जीवन के अधिकार की रक्षा के संवैधानिक दायित्व के निर्वहन में संभावित प्रशासनिक विफलता का विषय हो सकता है।
मामले में आयोग से समयबद्ध जांच, अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट, व्यक्तिगत जवाबदेही निर्धारित करने तथा Action Taken Report (ATR) प्राप्त करने की मांग की गई है।
AIRA NEWS NETWORK की विशेष रिपोर्ट
बिजनौर, उत्तर प्रदेश






