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स्टाफ़ की भारी कमी से जूझता स्योहारा का बिजली घर

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AIRA NEWS NETWORK – 6, हज़ार मीटर लम्बी HT लाइन व 45, से 50, ट्रांसफार्मरों, जिसपर सफियाबाद, मधुपुरा, नूरपुर रोड़, अलादिनपुर, चक महदूदसानी, पित्थापुर, मंसूर सराय सहित सात गांव व पालिका क्षेत्र के मोहल्ला पटवारियान,  मालियान, जुमेरात का बाज़ार, शेखान, जैन स्ट्रीट, नगर पालिका परिसर, मोहल्ला कस्बा, मिलकियान, सन्तोषी माता मंदिर, सहित दर्जनों मोहल्लों को विधुत सप्लाई करने वाले टाउन फस्ट नामक फीडर पर एक लाइनमैन भरत सिंह व एक संविदा कर्मी प्रवेश की तैनाती वर्षो से चली आ रही है।

स्टाफ़ ना बढाये जाने के चलते इस फीडर में हर दिन ख़राबी आना और उस ख़राबी को ठीक करने में कई कई घन्टो लग जाना आम बात हो गई है, रात में अगर ख़राबी आ जाये तो अगले दिन दोपहर तक ही फीडर के उपभोगताओं को बिजली मिल पाती है जाहिर सी बात है इतनी बड़ी लाइन पर दो कर्मचारी कहा-कहा अपनी नज़रे गड़ाये रखे, ऊपर से इस फीडर को सप्लाई देने वाले 33 केवी विधुत उपखण्ड स्योहारा की ज़िम्मेदारी सम्भाल रहे जेई, एसडीओ, व ईएक्सएन जिनको इस स्टेशन पर होना चाहिए वो वहा गैर हाज़िर मिलते है।

वतर्मान में जेई अपने होम टाउन सहारनपुर में बैठे बैठे स्योहारा बिजली घर चला रहे है, एसडीओ सुबह 11, बजे आकर सरकारी गाड़ी में बैठ शाम ढलने से पहले ही स्थानीय विधुत घर से 15, किलोमीटर दूर धामपुर अपने आवास में आराम फ़रमाते है, रही बात बड़े साहब “ईएक्सएन” सर की जिनको इन सभी पर नज़र रखने व सही से काम कराने की ज़िम्मेदारी मिली हुई है तो वो भी स्योहारा में ना बैठ धामपुर में बैठे-बैठे ही अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हैं।

ये तो थी स्योहारा बिजली घर के टाउन फस्ट फीडर से जुड़े उपभोगताओं की समस्या। अब कुछ सवाल जो विभाग की नियमावली से ही लिए गए है उनकी विभाग द्वारा अनदेखी क्यों और कब तक होती रहेगी।

विधुत उपभोगता सर्किल क्षेत्र को दो भागों में बांटा जाता है, पहला “रूलर” यानी (ग्रामीण) व दूसरा “अरबन” यानी (शहरी) इसी आधार पर घरेलू उपभोगताओं को बिजली कनेक्शन, बिल, व विधुत सप्लाई दी जाती है, ग्रामीण क्षेत्र के फीडरों की विधुत सप्लाई व शहरी यानी टाउन फीडर वालो को मिलने वाली विधुत सप्लाई व बिजली बिल में भी अंतर होता है, शहरी क्षेत्रों में यूनिट रेट ज़ियादा तो बिजली भी ज़ियादा, ग्रामीण क्षेत्रों में यूनिट रेट कम तो बिजली भी उन्हें कम दी जाती है।

अब जब विभाग इस नियमावली पर चलता है तो फिर बड़ा सवाल ये है कि स्योहारा स्थित इस 33, केवी उपखण्ड के टाउन फस्ट नामक फीडर पर 7, गांवों को क्यों जोड़ रखा है, और उन गांवों को भी शहर की तर्ज पर बिजली क्यों दी जा रही है, या फिर उनपर शहरी उपभोगताओं की तरह महंगी यूनिट दर का भर क्यों डाला जा रहा है।

सुझाव विभागीय नियम के मुताबिक़ टाउन फस्ट फीडर से ग्रामीण क्षेत्रों को अलग कर या तो एक नया फीडर बना दिया जाए या फिर किसी अन्य ग्रामीण फीडर से जोड़ दिया जाए। शहरी क्षेत्र के फीडर से गांवों को अलग किये जाने से शहरी व ग्रामीण दोनो ही उपभोगताओं जहां एक और लम्बी लाइन में हर दिन आने वाली ख़राबी से छुटकारा मिलेगा वही विभागीय कर्मचारियों को राहत मिलेगी।

ख़राब मौसम की तो बात ही ना कीजिये, परिंदा लाइन से टकरा गया तो बत्ती गुल,कौवे ने तार पर बैठ सुसु कर दिया तो बिजली गुल, मानों स्योहारा के विधुत उपभोगताओं का तो जैसे दुर्भाग्य ही ख़राब है?

अमीन अहमद की रिपोर्ट

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