दीवार नहीं गिरी… सिस्टम गिरा है! – प्रशासन, ठेकेदार और प्रबंधन की मिली भगत पर उठे गंभीर सवाल | मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज
कुमार गन्ना क्रेशर परिसर में दीवार गिरने से मजदूर की मौत का मामला पहुंचा राज्य मानवाधिकार आयोग, 1972/IN/2026 केस दर्ज
आईरा न्यूज़ नेटवर्क | बिजनौर/लखनऊ
बिजनौर जिले में मजदूर की दर्दनाक मौत का मामला अब गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के रूप में सामने आया है। इस प्रकरण को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए शिकायत दर्ज कर ली है और प्रशासन से जवाब तलब होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
शिकायतकर्ता डॉ. तारिक ज़की (वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स) द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत को आयोग ने डायरी संख्या 1972/IN/2026 के तहत स्वीकार कर लिया है।

घटना 15 मार्च 2026 को बिजनौर के नजीबाबाद-कोटद्वार रोड स्थित केशर परिसर में हुई, जहां अचानक आए तूफान के दौरान मजदूरों के रहने के लिए बनाए गए कमरों की दीवार गिर गई।
इस हादसे में:
शिवम (लगभग 28 वर्ष) की मौत हो गई
एक अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हुआ
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मजदूरों के लिए बनाए गए कमरे जर्जर और असुरक्षित थे, जिससे यह हादसा हुआ।
शिकायत में कहा गया है कि यह केवल एक हादसा नहीं बल्कि:
श्रमिक सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी
प्रशासनिक लापरवाही
और मजदूरों के “जीवन के अधिकार” का उल्लंघन है
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत “जीवन का अधिकार” सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की गारंटी देता है, जिसमें सुरक्षित कार्यस्थल भी शामिल है।
शिकायत में मानवाधिकार आयोग से निम्न मांगें की गई हैं:
मामले की उच्च स्तरीय जांच
मृतक के परिवार को कम से कम ₹5 लाख या अधिक मुआवजा
जिम्मेदार ठेकेदार/प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की जांच
जिले के सभी औद्योगिक स्थलों पर श्रमिक सुरक्षा ऑडिट
मृतक शिवम अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसकी मौत से परिवार गहरे आर्थिक और सामाजिक संकट में आ गया है।
यह मामला सिर्फ एक मजदूर की मौत नहीं बल्कि:
श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है
प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठाता है
और मानवाधिकार संरक्षण की गंभीर स्थिति को उजागर करता है
अगर समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता, तो यह हादसा टाला जा सकता था। यह घटना प्रशासन और उद्योग दोनों की जवाबदेही तय करने की मांग करती है।


















