गणेश ज्ञान बुद्धि से भरपूर थे, शिव परमात्मा से ज्ञान धारण कर संसार को बाँटा गणपति का सारा स्वरूप ही ज्ञानवान व्यक्ति के दिव्य कर्तव्य को दर्शाता है : ब्रह्माकुमारी

रांची : रॉची में गणेश चतुर्थी के पूर्व संध्या पर गणेश चतुर्थी के अध्यात्मिक रहस्यों को उजागर करते हुए ब्रह्माकुमारी केन्द्र
संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा यह यादगार अतीत के दिव्य कर्तव्यों का प्रतीक है। जब धरा पर अति पापाचार का समय आ जाता है तब निराकार शिव परमात्मा ज्ञान दान के लिए श्री गणेश का आवाह्न कर इस धरा पर ज्ञान प्रसारित करते है क्योंकि गणेश ज्ञान बुद्धि से भरपूर थे। उन्होंने शिव परमात्मा से ज्ञान धारण कर संसार को बाँटा गणपति का सारा स्वरूप ही ज्ञानवान व्यक्ति के दिव्य कर्तव्य को दर्शाता है। वर्तमान समय गणपति के जैसे ही बुद्धि एवं शक्ति को धारण करने की आवश्यकता है। गणपति के वास्तविक स्वरूप को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा जब हम गणेश के चित्र को अनुकूल रीति से देखते हैं तो विभिन्न प्रकार के भाव हमारे सामने आते हैं। गणपति के सिर को हाथो के सिर के रूप में चित्रण किया गया है जो विशाल बुद्धि का परिचायक है उसी प्रकार हाथी के सूंड की भी विशेशता है कि वह विशाल वृक्ष को उखाड़ कर फेंक सकता है तो सूक्ष्म से सूक्ष्म वस्तु को भी उठा सकता है। इस तरह हाथी में परखने की शक्ति भी तीव्र होती है। हाथी के बड़े बड़े कान उसके ज्ञान श्रवण के प्रतीक है। वे ध्यान और जिज्ञासा
पूर्वक ग्रहण करने की भावना से पूरा चित देकर सुनने के प्रतीक हैं। इस विधि से सुनने बिना मनुष्य विशाल बुद्धि हो ही नहीं सकता। हाथी के बड़ी आँखों की विशेशता है कि उसे
छोटी चीज बड़ी दिखाई देती है। इसी प्रकार ज्ञानवान व्यक्ति का भी अपना एक विशेष गुण होता है वो छोटों में भी बड़ाई देखता है। हरेक की महानता उसके सामने उभर आती है
इसलिए वह हरेक को आदर देता है। किसी के मन को अपने शब्दों से रौंदता नही गणपति के दूसरे हाथ में रस्सी और कुल्हाड़ी दिखाया जाता है जो इस बात का प्रतीक हैं कि दैशिक बंधनों को तो ज्ञान रूपी कुल्हाड़े से काटना है, परंतु अब स्वयं को दिव्य नियमों रूपी बंधन में बाँधना है। यह शुभ बंधन है। मोदक सफलता का सूचक है जब किसी को अपने लक्ष्य की सिद्धि होती है, तब वह खुब मिठाई बाँटता है और उसको खुशी के उत्सव में बदल देता है। इसी प्रकार ज्ञानवान व्यक्ति अपनी बुद्धि और स्थिती के बल से कार्य को निर्विघ्न रूप से करता हुआ सफलता तक ले जाता है और इसलिए स्वयं भी खुश रहता है और दूसरों को खुशी बॉटल है। “मोदक’ परिश्रम, तपस्या और बुद्धि के बल से सफलता और
खुशी की प्राप्ति का सूचक है। परंतु मोदक का हाथ में रखे रहना इस रहस्य का द्योतक है कि ज्ञानवान व्यक्ति स्तुति, महिमा, सफलता से होने वाले गर्व को आंतरिक रूप से स्वीकार कर उसके रस द्वारा नदोन्मत नहीं होता। इसी प्रकार उनके आसन का भी आध्यात्मिक चित्रण किया गया है। उनके एक पैर के अंगूठे को धरती को छूते हुए चित्रण किया गया है। भाव यह है कि उन्होंने मन को संसार से समेट तो पहले ही रखा है, निमित्त मात्र वे कर्म क्षेत्र पर हैं और इस पर भी वे क्षण में ही मन को इससे पूर्णतः हटाकर उपर की स्टेज में अविलम्ब रीति से स्थित हो सकते हैं। उनकी यह बैठक भी उनकी ज्ञान-निष्ठ स्थिति का परिचायक है। इस प्रकार हम देखते हैं कि गणपति के स्वरूप में विभिन्न अंगों का जो चित्रण किया गया है वे आध्यात्मिक रहस्य उदद्घाटित करते है। जिसे हमें अपने जीवन में धारण करने की आवश्यकता हैं। हमारे लिए यह सौभाग्य की बात है अब परमपिता परमात्मा शिव ने फिर से वह ज्ञान – कलश प्रदान किया है और फिर से उस तुप्त प्रायः ज्ञान का रहस्य सुनाया है।
प्रजापित ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय हरेक नर-नारी को अपनी यह निःशुल्क सेवा प्रदान करता है। चौधरी बगान, हरमू रोड सेवाकेन्द्र पर प्रातः 8.00 बजे से 10 बजे तथा संध्या में 4.00 बजे से 6.00 बजे तक पधार कर इसका लाभ उठा सकते हैं।


















