मेरी माटी मेरा देश अभियान के तहत पंच प्रण के संकल्प के साथ पवित्र भाव से जुड़ रहे लोग :

सुमरीन योगी
करनाल
मेरी माटी मेरा देश अभियान के तहत पंच प्रण के संकल्प के साथ पवित्र भाव से जुड़ रहे लोग :
कोई तुलसी की जड़ की मिट्टी, तो कोई केले की जड़ से, कोई अपने देवालय से, कोई शिवालय से, कोई रसोई की मिट्टी कर रहा अर्पित।
करनाल, 14 सितम्बर। करनाल जिला में मेरी माटी मेरा देश अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है और गांव-गांव जाकर माटी को नमन व वीरों का वंदन करने का कार्य निरंतर जारी है। पंच प्रण के संकल्प के साथ लोग बहुत पवित्र भाव से अपनी भावनाएं इस अभियान के साथ जोड़ रहे हैं। कोई तुलसी की जड़ की मिट्टी दे रहा, तो कोई केले की जड़ से, कोई अपने देवालय से, कोई शिवालय से, कोई रसोई की मिट्टी दे रहा है। सच में गांव के लोगों के अंदर देश प्रेम की भावनाएं बहुत प्रबल है।
वीरवार को अभियान के तहत करीब एक दर्जन गांवों में नेहरू युवा केन्द्र के वॉलिंटियर्स ने अभियान को गति प्रदान करते हुए घर-घर जाकर कलश में मिट्टी एकत्रित की और आमजन को अभियान के बारे में जागरूक किया। इस दौरान जिला के गांव सिंघडा, सिरसी, बडौता, बहलोलपुर, ईसलाम नगर सहित कई अन्य गांवों में अभियान चलाकर कार्यक्रम की जानकारी दी गई। यह जानकारी जिला युवा अधिकारी रेनू सिलग ने दी।
जिला युवा अधिकारी रेनू सिलग ने कहा कि हमारी मिट्टी शहीदों और वीरों की गाथाओं से भरी हुई है। न जाने कितने ही वीरों ने बिना किसी स्वार्थ के इसके लिए अपने प्राणों की आहूति दी है। इन्हीं वीर-शहीदों की शौर्य गाथा को याद करते हुए यह अभियान चलाया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में यह अभियान नेहरू युवा केन्द्र के वॉलिंटियर्स के माध्यम से चलाया जा रहा है। गांव के लोगों में भी अभियान को लेकर काफी उत्साह है। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार के अभियान से बच्चों का ज्ञानवर्धन होता है और उन्हें वीर शहीदों के बलिदान बारे पता चलता है। गांव के पूर्व सैनिक व सैनिक परिवार भी अभियान में बढ-चढकर सहयोग कर रहे है।
अभियान के बारे बताते हुए एडीसी डॉ. वैशाली शर्मा ने कहा कि मेरी माटी मेरा देश अभियान की श्रृंख्ला में 1 सितम्बर से 30 अक्तूबर तक जिला में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। मेरी माटी मेरा देश अभियान वास्तव में देश की स्वतंत्रता और प्रगति की यात्रा का स्मरण कराते हुए, भारत की मिट्टी और शौर्य के एकीकरण को दर्शाता है। यह कार्यक्रम अपनी मिट्टी से जुडने, अपने नायकों का सम्मान करने और इस तरह अपने मन में राष्ट्रीय गौरव की भावना भरने का कार्यक्रम है, जो निश्चित रूप से भावी पीढियों को भारत की पोषित विरासत की रक्षा के लिए प्रेरित करेगा।


















