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आंबेडकर: सामाजिक सरोकार के सर्वोच्च व्यक्तित्व

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आंबेडकर: सामाजिक सरोकार के सर्वोच्च व्यक्तित्व

सामाजिक समानता व सामाजिक- राष्ट्रीय एकता के भविष्य निर्माता के अग्रणी पथ-प्रदर्शक डा.भीमराव अंबेडकर की शांतिमय प्रेरणा उन्नत भविष्य के निर्माण का सर्वोच्च मंत्र है।शिक्षा की महत्ता, व्यक्ति के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास व राष्ट्र निर्माण का माध्यम है,के मूल्यवान मंत्र प्रणेता के अग्रदूत के रूप में शिक्षा की महत्ता को प्रभावी ढंग से सदुपयोगिता के प्रेरक व्यक्तित्व हैं।

भारतीय संविधान के शिल्पकार, वंचित तबकों के समानता के साथ अधिकार व समन्वयकारी बंधुत्व की भावना के प्रभावी पैरोकार को शत शत नमन।
समानता व संरक्षण के साथ अंतोदय व सर्वोदय उपागम का मानवीय मूल्यों के साथ द्वेष रहित प्रतिनिधित्व आंबेडकर की विचारधारा का मूल मंत्र है।गांधी जी के सामाजिक उत्थान की दूरगामी विचारधारा के मंत्र को सिद्ध करने में बाबा साहेब की महत्वपूर्ण भूमिका रही।समाज, सामाजिक समानता के साथ मानवीय मूल्यों का उच्च आदर्श है।ऐसा समाज ही सर्वोपरि व सुरक्षात्मक परिधि का चिन्हांकन है।
आदर्श राज्य की परिभाषा में आर्थिक उन्नति ही मार्गदर्शक सिद्धांत नहीं है, बल्कि सामाजिक उन्नति का समानतामय पारिस्थितिकी अति आवश्यक है।यही संतुलित विकास है।
गरिमामय जीवन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।जिस प्रकार प्रकृति कोई भेदभाव धूप,छांव,वर्षा,पानी,धरती आदि उपलब्ध कराने में नहीं करती,जिस प्रकार मानवीय संरचना आंख,कान,रक्त,चमड़ी,हृदय आदि में जैव विकास के प्राकृतिक सिद्धांत भेदभाव नहीं करते,उसी प्रकार सामाजिक विच्छेद की भावना या भेदभाव की भावना मजबूत सामाजिक तंत्र को कभी स्थापित नहीं कर सकता।

महिला सशक्तिकरण किसी भी राष्ट्र के विकास का बाह्य मूल्यांकन का प्रथम मानक है तथा आंतरिक मूल्यांकन का सशक्त सर्वोच्च प्राथमिकता।इस प्रकार महिला सशक्तीकरण राष्ट्र ही नहीं बल्कि परिवार सशक्तिकरण व उन्नतिशील उन्नयन व अग्रगामी बनने का धनात्मक उत्प्रेरक है।
शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, समन्वय, संरक्षण व समानता, भाईचारा व कल्याणकारी राज्य की संकल्पना, भारत‌ के सर्वोच्च ग्रंथ संविधान का वास्तविक स्वरूप भी तो यही है। राज्य की सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण का सिद्धांत भी यही है।शासन व प्रशासन जिस पर उच्चतम शिखर के सिध्दि की ओर अग्रसर है। नैतिक जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक का है कि गली-मुहल्ले का हर बच्चा स्कूल जाये, आखिर शिक्षा ही तो जागरूक व आत्मनिर्भर नागरिक को जन्म देती है। स्कूल चलो अभियान का उद्देश्य भी यही है। प्रत्येक कल्याणकारी योजनाएं आदर्श राज्य की जिम्मेदारी है,जो पूर्ण हो रहीं हैं।

अधिकारों के साथ कतिपय कर्तव्य भी हैं।इस कर्तव्य से प्रकृति भी बंधी है।जैसे ठंड के मौसम में शीत स्वाभाविक है,वैसे ही वर्षा ऋतु में बारिश।यह प्रकृति का सिद्धांत है।उसी प्रकार हम प्रत्येक जिम्मेदार भारतीय नागरिक का कर्तव्य है कि अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सामूहिकता से करें,यही तो‌‌ कल्याणकारी राज्य की स्वप्रेरक उपसंहार है।

-धर्मजीत त्रिपाठी
(अपर मुख्य अधिकारी
पंचायती राज विभाग
उत्तर प्रदेश )

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