AIRA NEWS NETWORK – यह दशक ‘भारत का टेकेड’ दशक कहलाएगा। दरअसल, वित्त वर्ष-2022 टेक उद्योग के लिए खास उपलब्धियों भरा वर्ष रहा है और अभी आने वाले दिन भी भारत के टेक जगत के लिए खास उपलब्धियों भरे रहने वाले हैं। जी हां, यही वो समय है जब भारत 1 ट्रिलियन-डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने की ओर अग्रसर है।
याद हो, पीएम मोदी ने 28 दिसंबर 2021 को आईआईटी कानपुर के 54 वें दीक्षांत समारोह के संबोधन में कहा था कि 21वीं सदी, पूरी तरह ‘Technology Driven’ है। इस दशक में भी ‘Technology’, अलग-अलग क्षेत्रों में अपना दबदबा और बढ़ाने वाली है। बिना Technology के जीवन अब एक तरह से अधूरा ही होगा। ये जीवन और Technology की स्पर्धा का युग है।
सचमुच जिस तेज गति से भारत ‘टेक युग’ की और बढ़ रहा है, उससे यही नजर आता है कि आने वाले समय हमारे जीवन में तकनीक आधारित ही रहने वाला है। आज देश के तमाम संस्थानों में पढ़ने वाले युवा अपनी नौजवानी के इतने महत्वपूर्ण वर्ष टेक्नोलॉजी का एक्सपर्ट बनने में जो लगा रहे हैं। इन युवाओं के पास भारत के साथ-साथ अब पूरे विश्व में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में योगदान करने का बहुत बड़ा अवसर है और भारत की युवा पीढ़ी इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देगी। बीते वित्त यानि 2021-22 में कुछ ऐसे ही नतीजे सामने भी आए हैं। आइए अब जानते हैं इनके बारे में…
दुनिया का सबसे बड़ा टेक स्टार्टअप हब:
आज भारत के पास 75 से अधिक यूनिकॉर्न (unicorns) हैं, 50 हजार से भी अधिक स्टार्ट-अप हैं। इनमें से 10 हजार स्टार्टअप तो कुछ महीनों पहले ही आए हैं। इस तरह आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बनकर उभरा है। इनमें से कितने स्टार्टअप्स तो हमारी आईआईटी के युवाओं ने ही शुरू किए हैं। अभी हाल ही की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया के कई विकसित देशों को पीछे छोड़कर तीसरा सबसे बड़ा यूनिकॉर्न कंट्री बन गया है।
जी हां, आज देश में जो एक के बाद एक बदलाव हो रहे हैं, उनके पीछे देश की युवा पीढ़ी का ही का चेहरा नजर आता है। आज जो लक्ष्य देश तय कर रहा है, उसकी प्राप्ति की शक्ति भी देश को इन्हीं युवाओं से मिल रही है। ये अनंत संभावनाएं युवाओं के लिए ही हैं, और युवाओं को ही इन्हें साकार करना है। देश जब अपनी आजादी के 100 वर्ष मनाएगा तो उस सफलता में भी इन्हीं युवाओं के पसीने की महक होगी, इनके परिश्रम की पहचान होगी।
‘आत्मनिर्भर भारत’ की नींव तैयार करने के लिए हुआ काम:
बीते वर्षों में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नींव तैयार करने के लिए देश ने किस तरह काम किया है। पिछले 7 साल में देश में ‘स्टार्ट-अप इंडिया’, ‘स्टैंड-अप इंडिया’ जैसे प्रोग्राम शुरू हुए हैं। अटल इनोवेशन मिशन और पीएम रिसर्च फेलोशिप के जरिए देश युवाओं के लिए नए रास्ते बना रहा है।
केंद्र सरकार ने बड़े ब्लॉकेज भी किए दूर:
इसके अलावा भारत में ‘नेशनल एजुकेशन पॉलिसी’ के साथ ‘फ्युचरिस्टिक ट्रीटमेंट’ की नई पीढ़ी को तैयार करने की शुरुआत भी हुई। साथ ही साथ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी सुधारा गया। ऐसे तमाम पॉलिसी ब्लॉकेज केंद्र सरकार ने बीते सालों में दूर किए हैं। इन प्रयासों के ही परिणाम इतने कम समय में आज हमारे सामने हैं।
वैश्विक सोर्सिंग में भारत की 59% हिस्सेदारी:
वैश्विक सोर्सिंग में आज भारत की करीब 59 प्रतिशत हिस्सेदारी हो गई है। इसी के साथ भारत में उद्योगों का राजस्व बढ़कर 200 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। NASSCOM की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय आईटी उद्योग ने इस वित्तीय वर्ष में राजस्व में $200 बिलियन का आंकड़ा पार कर लिया है, जो भारत के प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। इसने भारत में सबसे बड़े निजी क्षेत्र के नियोक्ता के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत किया है
जो पिछले 2 वर्षों में 2 मिलियन से अधिक जोड़े के साथ 5 मिलियन प्रत्यक्ष नौकरियों के लिए जिम्मेदार है। यानि भारत लगातार इस क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए अपनी धाक जमाने में लगा है। वित्त वर्ष 2022 में भारत ने कुल 227 बिलियन डॉलर का राजस्व अर्जित किया है। 2011 के बाद से यह अब तक की सर्वाधिक वृद्धि है। इस आधार पर राजस्व में 15.5 % की वृद्धि हुई है।
36 प्रतिशत महिलाओं समेत औद्योगिक कार्यबल क्षमता 51 लाख:
टेक युग में प्रवेश के साथ ही भारत में 36 प्रतिशत महिलाओं समेत औद्योगिक कार्यबल क्षमता में भी वृद्धि हो रही है। जी हां इस क्षेत्र में अब महिलाओं की कार्यबल क्षमता 51 लाख हो गई है। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

















