गोंडा – जिले के करीब चार लाख बच्चे परिषदीय स्कूलों में पढ़ते हैं इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अक्षर ज्ञान के साथ अन्य सुविधाएं भी सरकार उपलब्ध कराती है देखभाल न होने से इनमें से कई स्कूलों के भवन जर्जर हालत में होने से 50 हजार से अधिक बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं यह बच्चे जिन स्कूलों की छत के नीचे पढ़ाई करते हैं, उन स्कूलों को अब ढहाए जाने और नए स्कूल भवन बनाए जाने की जरूरत है ।
जिले में 31 सौ परिषदीय स्कूल संचालित हैं इनमें से 901 जूनियर तथा 26 सौ प्राइमरी स्कूल हैं इसमें करीब 900 स्कूलों को कंपोजिट बना दिया गया है इन सभी स्कूलों के भवनों में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं पहले चरण में 326 जर्जर स्कूल चिह्नित हुए थे इसमें से 279 स्कूल भवनों को ढहा दिया गया इसमें 48 स्कूल भवन बचे हुए हैं इसके अलावा नए सिरे से 565 स्कूल भवन और जर्जर होने की श्रेणी में आ गए हैं ऐसे में कुल मिलाकर 613 स्कूल भवन जर्जर की सूची में आ चुके हैं ।
इनमें से कुछ ही स्कूलों में नए कक्षों का निर्माण हुआ है परंतु सभी कमरों में बच्चों की कक्षाएं संचालित हो रही हैं इन जर्जर हो चुके स्कूलों में करीब 50 हजार बच्चे पढ़ते हैं और इन्हें करीब 200 से अधिक शिक्षक, शिक्षामित्र पढ़ाते हैं परसपुर ब्लाक की ग्राम पंचायत बाक्साइला कंपोजिट विद्यालय बहुत ही जर्जर स्थिति में है जरा सी बरसात होने पर ही छतों से पानी टपकने लगता है बरसात में पानी टपकता रहता है इससे बच्चों और शिक्षकों को बरसात के महीने में छत के नीचे बैठ कर पठन-पाठन में दिक्कत होती है प्रधानाध्यापक ने घनश्याम सिंह ने बताया कि भौतिक संसाधन प्रारूप पर सूचना 29 मई 2021 तथा खंड विकास अधिकारी परसपुर को 16 नवंबर 2018 को ही सूचित किया जा चुका है घनश्याम सिंह ने बताया कि विद्यालय की छत इतनी जर्जर है की उसमें बैठकर पढ़ाने से डर लगता है।


















