असम/गुवाहाटी

पूर्वोत्तर वह स्थान नहीं जहाँ भारत समाप्त होता है, बल्कि जहाँ से भारत शुरू होता है।” : जनरल उपेंद्र द्विवेदी

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पूर्वोत्तर वह स्थान नहीं जहाँ भारत समाप्त होता है, बल्कि जहाँ से भारत शुरू होता है।” : जनरल उपेंद्र द्विवेदी
नमामि भारतम्’ के साथ गूँजा वंदे मातरम्, 150 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में सामूहिक गायन

गुवाहाटी: राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र के तत्वावधान में नमामि भारतम्’ कार्यक्रम के अंतर्गत सामूहिक वंदे मातरम् गायन समारोह का आयोजन श्रीमंत शंकरदेव अंतरराष्ट्रीय सभागार, कलाक्षेत्र, पंजाबारी, गुवाहाटी में प्रातः 11 बजे किया गया। इस अवसर पर पूरे देश में एक साथ वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी (सेवानिवृत्त) के साथ संजीव बोरदोलोई, एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) डॉ. पवन तिवारी, संगठन मंत्री विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र, डॉ. जगदिनद्र राय चौधरी, मंत्री विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र, कुलेन्द्र कुमार भगवती, अध्यक्ष शिशु शिक्षा समिति असम, गौरव कलिता सयोजक नमामि भारतम एवं असम गौरव मीनाक्षी सहित विद्या भारती के पदाधिकारी, पूर्व छात्र, शिक्षक, नागरिकगण, माता-बहनें एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. पवन तिवारी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक एकात्मता और गौरव का स्वर है। उन्होंने कहा कि इसके 150 वर्ष पूर्ण होने का अवसर पूरे देश के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि माँ कामाख्या की पावन भूमि, श्रीमंत शंकरदेव की आध्यात्मिक चेतना और वीर लाचित बरफुकन के शौर्य से प्रेरित पूर्वोत्तर से उठने वाला वंदे मातरम् का स्वर संपूर्ण भारत की राष्ट्रीय एकात्मता का स्वर है।

मुख्य अतिथि पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि वे इस अवसर पर पूर्व सेना प्रमुख के रूप में नहीं, बल्कि सरस्वती शिशु मंदिर के पूर्व छात्र के रूप में उपस्थित हैं। उन्होंने कहा, “पूर्वोत्तर वह स्थान नहीं है जहाँ भारत समाप्त होता है, बल्कि यह वह स्थान है जहाँ से भारत शुरू होता है। यह भारत का सच्चा प्रवेश द्वार है।” उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि वंदे मातरम्’ पूरे राष्ट्र का युद्धघोष है, जिसकी पहचान भारत है और जिसका उद्देश्य 2047 तक विकसित भारत का निर्माण है। उन्होंने युवाओं को Attitude, Adaptability और Ability अर्थात सकारात्मक सोच, परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता और योग्यता को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को केवल Problem Finder नहीं, बल्कि Problem Fixer बनना चाहिए। इसके लिए सकारात्मक सोच, जिम्मेदारी, साहस और कठिन परिस्थितियों से संघर्ष करने की क्षमता आवश्यक है। उन्होंने युवाओं को Learn, Unlearn and Relearn के सिद्धांत को अपनाने तथा भारतीय संस्कारों और सोच को बनाए रखते हुए आधुनिक तकनीक को आत्मसात करने का संदेश दिया।

जनरल द्विवेदी ने पूर्वोत्तर के वीरों और राष्ट्रीय नायकों का स्मरण करते हुए वीर लाचित बरफुकन और कनकलता बरुआ के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर केवल भारत की भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि देश की शक्ति, नेतृत्व और राष्ट्रीय एकता का महत्वपूर्ण केंद्र है।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना, एनसीसी और विद्या भारती विविधता को शक्ति में बदलने का कार्य करते हैं। उन्होंने पूर्व छात्रों से नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करने और समाज के नागरिकों से युवाओं के लिए अवसरों के द्वार खोलने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को प्रतिदिन शून्य-दस’ की आदत अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि हर सुबह दस मिनट बिना मोबाइल के अपने लक्ष्य, कृतज्ञता और दिन के संकल्प पर विचार करें।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे प्रतिदिन स्वयं से पूछें—“आज मुझे ऐसा क्या सीखना है, जिससे कल मैं और मेरा देश दोनों बेहतर बन सकें?” उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे जिस भी क्षेत्र में जाएँ, अपनी प्रतिभा और क्षमता के माध्यम से भारत को अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लें।

HALIMA BEGUM

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