12 साल बाद दलित युवक हत्याकांड में बड़ा फैसला: तीन दोषियों को उम्रकैद, एक बरी

आजमगढ़। बहुचर्चित दलित युवक हत्याकांड में सोमवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दो दोषियों पर 25-25 हजार रुपये और एक पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। वहीं, पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में एक आरोपी को दोषमुक्त कर दिया गया।
यह फैसला एससी/एसटी कोर्ट के जज विजय कुमार वर्मा ने सुनाया।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन के अनुसार वादिनी हेमा कुमारी निवासी रोवापार, थाना मेहनाजपुर के भाई अर्जुन की रोहित उर्फ कमलेश निवासी विनैकी, थाना मेहनाजपुर से पुरानी रंजिश चल रही थी।
31 अगस्त 2014 की सुबह करीब 7:30 बजे अर्जुन अपनी बेटी और भांजी के साथ बाइक से घर लौट रहे थे। तभी कूबा डिग्री कॉलेज के सामने रोहित उर्फ कमलेश, सरजू, डंपी उर्फ तेजप्रताप सिंह (निवासी रोवापार) और जितेंद्र सिंह (निवासी शाहपुर, थाना मेहनाजपुर) ने उन्हें रोक लिया।
आरोप है कि सभी हमलावरों ने अर्जुन को गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
अदालत का फैसला
पुलिस ने जांच के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक आलोक त्रिपाठी ने 13 गवाहों को अदालत में पेश किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने:
• रोहित उर्फ कमलेश – आजीवन कारावास + ₹25,000 अर्थदंड
• सरजू – आजीवन कारावास + ₹25,000 अर्थदंड
• डंपी उर्फ तेज प्रताप सिंह – आजीवन कारावास + ₹50,000 अर्थदंड
• जितेंद्र सिंह – साक्ष्य के अभाव में बरी
करीब 12 साल बाद आए इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।























