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बिजनौर में कथित अवैध कॉलोनी प्रकरण: तहसीलदार की जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल, मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला

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बिजनौर में कथित अवैध कॉलोनी प्रकरण: तहसीलदार की जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल, मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला

संवाददाता : इशरत अली (शानू सिद्दीकी)

स्योहारा/बिजनौर | 28 जुलाई 2026

जनपद बिजनौर के तहसील नजीबाबाद अंतर्गत ग्राम औरंगपुर बसंता स्थित गाटा संख्या-182 पर कथित अवैध कॉलोनी निर्माण का मामला अब उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ता मो. मोहिउद्दीन ने आरोप लगाया है कि उनकी शिकायत पर तहसीलदार, नजीबाबाद द्वारा प्रस्तुत जांच आख्या अपूर्ण, पक्षपातपूर्ण तथा तथ्यों के अनुरूप नहीं है।
शिकायतकर्ता के अनुसार मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया था कि संबंधित भूमि पर बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति, बिना स्वीकृत मानचित्र तथा आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए आवासीय कॉलोनी विकसित की जा रही है। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट में इन आरोपों के सभी पहलुओं की विस्तार से जांच नहीं की गई।
शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि जांच आख्या में गाटा संख्या-182 पर कॉलोनी विकसित होने का उल्लेख है, जबकि भूमि के एक हिस्से से संबंधित वैधानिक प्रक्रिया के बारे में अलग स्थिति दर्ज की गई है। इसी आधार पर उन्होंने जांच की निष्पक्षता पर प्रश्न उठाते हुए स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।


इस संबंध में शिकायतकर्ता ने उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत प्रस्तुत की है, जिसे आयोग ने डायरी संख्या 5978/IN/2026 के तहत दर्ज कर लिया है। आयोग के समक्ष प्रस्तुत शिकायत में निष्पक्ष जांच, संबंधित अभिलेखों की समीक्षा तथा आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि संबंधित भूमि के मामले में पूर्व से एक आपराधिक प्रकरण भी दर्ज है और उसका परीक्षण भी समग्र जांच का हिस्सा होना चाहिए।
फिलहाल इस प्रकरण में मानवाधिकार आयोग द्वारा आगे की कार्यवाही की प्रतीक्षा है। संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से आयोग के समक्ष प्रस्तुत होने वाली रिपोर्ट और अभिलेखों के आधार पर आगामी निर्णय लिया जाएगा।
नोट: इस समाचार में शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप और उनकी ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है। संबंधित अधिकारियों अथवा अन्य पक्षों का अंतिम पक्ष आयोग या सक्षम प्राधिकारी के समक्ष विचाराधीन है। इसलिए मामले का अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एवं वैधानिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
संवाददाता : इशरत अली (शानू सिद्दीकी)

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