⚡ बिजनौर में करंट से किशोरी की मौत: NHRC ने लिया संज्ञान :मुआवज़े की माँग

दोषी कर्मचारियों/अधिकारियों पर आपराधिक और विभागीय कार्रवाई की जाए-डॉ तारिक़ ज़की
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📅 दिनांक: 10 जून 2025 | 📍 बिजनौर, उत्तर प्रदेश
✍️ संवाददाता:अमीन अहमद
⚡ बिजनौर में करंट से किशोरी की मौत: NHRC ने लिया संज्ञान :मुआवज़े की माँग
बिजनौर ज़िले के थाना नांगल सोती क्षेत्र अंतर्गत ग्राम छींदोक में 8 जून को हुई एक हृदयविदारक घटना में, 14 वर्षीय किशोरी अंशिका की मौत बिजली के खंभे में उतरे करंट की चपेट में आकर हो गई। इस हादसे के बाद परिजनों द्वारा लगाए गए लाइनमैन की लापरवाही और अभद्रता के आरोपों पर अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है।

वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स संगठन (WAOHR) के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. तारिक ज़की द्वारा इस मामले को आयोग में प्रस्तुत किया गया था, जिस पर NHRC ने कार्रवाई करते हुए शिकायत को डायरी संख्या 13397/IN/2025 के तहत दर्ज किया है।

⚠️ क्या है मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 14 वर्षीय किशोरी अंशिका (पुत्री श्री सुनील सिंह) किसी कार्य से गांव के बाहर गई थी, जहां रास्ते में खड़े विद्युत पोल में करंट उतर आया। करंट की चपेट में आने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

मृतका की मां का आरोप है कि इस पोल में पहले से करंट था और इसकी सूचना कई बार विद्युत विभाग को दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब हादसे के बाद उन्होंने विरोध किया, तो मौके पर मौजूद लाइनमैन ने न केवल लापरवाही दिखाई बल्कि कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग भी किया।
📌 मानवाधिकार आयोग में दर्ज शिकायत के मुख्य बिंदु:
बिजली विभाग की घोर लापरवाही, जिसके चलते पोल में करंट आया।
लाइनमैन की असंवेदनशीलता और बदतमीजी, जिसने दुखी परिजनों को और मानसिक आघात पहुंचाया।
ग्रामीणों द्वारा पहले से शिकायत किए जाने के बावजूद कोई Earth Leakage Protection नहीं लगाया गया था।
क्षेत्रीय प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही।
📢 डॉ. तारिक ज़की ने NHRC से की ये मांगें:
- दोषी कर्मचारियों/अधिकारियों पर आपराधिक और विभागीय कार्रवाई की जाए।
- मृतका के परिजनों को ₹10 लाख का मुआवजा दिया जाए।
- क्षेत्र में सभी बिजली पोलों पर Earth Leakage Breaker (ELB) लगाए जाएं।
- संवेदनशील स्थानों की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए और समय-समय पर निरीक्षण सुनिश्चित हो।
🏛️ NHRC की कार्रवाई:
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने डॉ. ज़की की शिकायत को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि प्राथमिक तथ्यों की पुष्टि होती है तो संबंधित राज्य व विभागों से जवाब-तलबी की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई होगी।
🗣️ ग्रामीणों में आक्रोश:
गांव छींदोक में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। “अगर समय रहते विभाग हरकत में आता, तो हमारी बेटी आज जिंदा होती,” – पीड़िता के परिजन ने कहा।
📣 आईरा न्यूज़ नेटवर्क की अपील:
विद्युत विभाग एवं प्रशासन को चाहिए कि इस प्रकार की घातक लापरवाहियों को रोकने के लिए ठोस और पारदर्शी व्यवस्था लागू करें, जिससे भविष्य में किसी और अंशिका को अपनी जान न गंवानी पड़े।
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