हाजी इकबाल गरीब मजलूम की आवाज थे: हाजी तालिब अंसारी

पुण्य तिथि पर याद आए गरीबों और मजलूमों की आवाज हाजी इकबाल
मुरादाबाद: मुरादाबाद की सामाजिक और राजनीतिक शख्सियतों में शामिल हाजी इकबाल का नाम भी सुनहरे अक्षरों में दर्ज है वह कोई सांसद या विधायक नही थे उनकी पहचान एक इंकलाबी नेता के रूप में थी मुरादाबाद के कलेक्ट्रेट से लेकर जंतर मंतर तक पहुंचकर उन्होंने अवामी फला बेहबूद के लिए संघर्ष किया।
हाजी इकबाल चौधरी चरण सिंह को अपना आदर्श मानते थे बीकेडी से लेकर जनता दल और लोकदल के कई बड़े पदों पर रहे हाजी इकबाल ने राजनीति में बढ़ते राजनीतिक प्रदूषण और कमजोर होते लोकतंत्र को बचाने के लिए लोकतंत्र बचाओ मोर्चे की स्थापना की थी उनका मानना था कि राजनीति में सरमायेदारो की बढ़ती एंट्री ने बुनियादी राजनीतिक ढांचे को कमज़ोर कर दिया है जिससे देश और जनता के लिए काम करने वाले नेताओं की उपेक्षा की जा रही है सरकारी योजनाएं जन कल्याण के लिए नही बल्कि उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए बन रही हैं और देश में सांप्रदायिकता भी बढ़ रही है यही कारण था कि उन्होंने राजनीतिक दलों से दूरी बना ली थी और सभी सामाजिक और राजनीतिक लोगों को साथ लेकर वह राष्ट्रवाद और सेवा भाव का माहौल चाहते थे आज उनकी तीसरी बरसी है वह दलितों,किसानो,मजदूरों, अल्पसंख्यकों,महिलाओं आदि से जुड़े तमाम मुद्दों को उठाते थे पीतल मजदूरों और कारखानेदारो के हक में उन्होंने कई बड़े आंदोलन किए। उनको याद कर आज कई लोगों की आंख नम हो गई।
हाजी इकबाल गरीब मजलूम की आवाज थे: हाजी तालिब अंसारी
मुरादाबाद: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता हाजी तालिब अंसारी उनको याद करते हुए कहते हैं कि हाजी इकबाल गरीब और शोषितों की आवाज थे उन्होंने अपना पूरा जीवन आवाम को समर्पित कर दिया था उन्होंने बताया कि विधानसभा में डिप्टी स्पीकर और उत्तर प्रदेश में मंत्री रहे राम आसरे वर्मा उनको राजनीतिक संत कहते थे क्योंकि वह राजनीति में बढ़ते भ्रष्टाचार और उद्योगपतियों के बढ़ते प्रभाव से चिंतित थे वह निजीकरण और वैश्वीकरण के घोर विरोधी थे। श्री अंसारी ने कहा कि आज उनको याद कर आंख नम हो जाती है मुरादाबाद में आज जन हित के मुद्दों को उठाने वाला उन जैसा कोई योद्धा नही वह मजलूमों की आवाज थे।
हर वर्ग की आवाज थे हाजी इकबाल
उनके राजनीतिक शिष्य रहे राजेंद्र बालनिकी कहते हैं कि 2 जुलाई 2020 तिथि मेरे दुर्भाग्य की सबसे बड़ी राजनीतिक सामाजिक सुनामी का दिन है इसी दिन मेरे गुरु स्वर्गीय श्री हाजी मोहम्मद इकबाल साहब संस्थापक लोकतंत्र बचाओ मोर्चा अचानक प्रथम लॉकडाउन में स्वर्ग सिधार गये । प्रतिदिन उनसे राजनीतिक विचारधारा को समझने का कोशिश करता था रोज नए अध्याय सीखने को मिलते थे, कठिन लॉकडाउन में उनको समय से सही इलाज ना मिलने का अफसोस है सभी क्लिनिक बंद थे। मुरादाबाद के उनके सभी प्रिय जन उनके जीवन की हानि को महसूस करते हैं जो कभी पूरी नहीं की जा सकती। पीतल मजदूर हो सफाई मजदूर हो किसान हो दलित हो गरीब हो वंचित हो उनकी आवाज को उठाने में मुरादाबाद की धरती से हाजी मोहम्मद इकबाल प्रथम स्थान रखते थे।
आपका जीवन प्रमाणित करता है नेता वैचारिक व्यक्ति किसी विधायक सांसद पद का मोहताज नहीं होता, आपने 20 वर्ष पूर्व भी महसूस कर लिया था कि आने वाला समय लोकतंत्र के लिए खतरनाक होगा अपराधिक लोग आर्थिक अपराध करने वाले कारपोरेट घराने लोकतंत्र और संविधान को नुकसान पहुंचा कर सत्ता को उंगली पर नचाएंगे। गरीब इंसान के हितों की रक्षा नही होगी
राहत अंसारी के आवास पर उनको याद कर श्रद्धांजलि दी और दुआ की इस मौके पर सय्यद अनवर अली ने दुआ करवाई इस मौके पर हाजी तालिंब अंसारी,राजेंद्र बाल्मिकी,डॉक्टर आसिम खान,साजिद नबी खान, आमिर आरिश अंसारी,आसिफ अंसारी,फैजान कुरैशी,अरशद खान आदि थे


















