मृत्यु दर कम करने के लिए जिला प्रशासन की पहल, घर-घर पहुंचेगी स्वास्थ्य किट

मृत्यु दर कम करने के लिए जिला प्रशासन की पहल, घर-घर पहुंचेगी स्वास्थ्य किट, होगी सभी की स्क्रीनिंग, बनाए 50 ग्रामीण आईसोलेशन सैंटर, दी 650 बैडों की सुविधा, 200 एबीबीएस छात्र देख रहे हैं होम आईसोलेटिड मरीजों को, मिलेंगे बेहतर परिणाम : उपायुक्त निशांत कुमार यादव।
उपायुक्त ने जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की कारगुजारी को मीडिया के सामने रखा, कहा 24 घंटे मरीजों के साथ जुड़ा है स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन, मरीजों को वितरित की जा रही हैं स्वास्थ्य किट।
करनाल 18 मई, उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने कहा कि करीब 94 प्रतिशत होम आईसोलेटिड मरीजों को घर पर ही बेहतरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा करीब 6 हजार स्वास्थ्य किट तैयार करवाई गई हैं। प्रत्येक किट में 15 आईटम शामिल हैं, जिनमें ऐलोपैथिक व आयुर्वेदिक दवाईयों, मास्क, ट्रिपल ए बैटरी सहित पल्स ऑक्सीमीटर, डिजिटल थर्मामीटर, स्टीमर और एक बुकलेट डाली गई है। दवाईयों में पैरासीटामोल, विटामिन बी, ओआरएस पैकेट, अणु तेल, काढ़ा और गिलोय वटी ली गई हैं जबकि पल्स ऑक्सीमीटर, डिजिटल थर्मामीटर और स्टीमर भी डाले गए हैं जो रिट्रीवल यानि पुन: प्राप्ति के आधार पर रहेंगे अर्थात् वितरण के दिन से लेकर एक सप्ताह बाद संबंधित आईसोलेटिड मरीज से तीन चीजें वापिस ली जाएंगी, यह काम संबंधित एरिया की आशा और एएनएम करेंगी। वापिस ली गई तीनों आईटमों पल्स ऑक्सीमीटर, डिजिटल थर्मामीटर और स्टीमर को अच्छी तरह से सैनिटाईज करने के बाद इन्हें नए आईसोलेटिड मरीजों को दिया जाएगा, ताकि जरूरत पडऩे पर नए संक्रमित मरीजों को उपलब्ध करवाई जा सके।
उपायुक्त निशांत कुमार यादव मंगलवार को लघु सचिवालय के सभागार में स्वास्थ्य किट के वितरण कार्य को लेकर मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में केवल 6 प्रतिशत मरीज ही दाखिल हैं, शेष 94 प्रतिशत होम आईसोलेटिड हैं, ऐसे मरीजों को भी बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों इसके लिए प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य किट तैयार करवाई गई हैं, जिसे पीएचसी के माध्यम से संबंधित गांव के मरीज के घर तक पहुंचाया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा किट वितरण का कार्य सुचारू रूप से सम्पन्न हो इसके लिए उच्च अधिकारियों को देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उन्होंने बताया कि गत दिवस तक जिला में करीब 4200 होम आईसोलेटिड मरीज हैं, परंतु प्रशासन ने 4200 होम आईसोलेटिड मरीजों की बजाए 6 हजार किट तैयार करवाई हैं। इनके वितरण का कार्य आज से ही शुरू हो गया है। प्रत्येक दिन नए होम आईसोलेटिड मरीजों तक इनको पहुंचाया जाएगा। किट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हैल्पलाईन नम्बर 1950 से जानकारी हासिल की जाएगी। इसके अलावा संबंधित एसडीएम अपने-अपने क्षेत्र के नोडल अधिकारियों से प्रत्येक दिन की रिपोर्ट लेते रहेंगे।
डीसी ने एक सवाल के जवाब में बताया कि जो पहले से होम आईसोलेटिड मरीज हैं उनके स्वास्थ्य के हालचाल बारे करीब 200 एबीबीएस विद्यार्थी तैनात किए गए हैं जोकि प्रत्येक दिन कॉल पर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेते हैं। अगर किसी को मेडिसिन की जरूरत है तो उसे घर ही स्वास्थ्य किट पहुंचाई जा रही है। फिर भी यदि किसी मरीज के स्वास्थ्य में गिरावट आती है तो उसे तुरंत केसीजीएमसी कोविड अस्पताल में दाखिल करवाकर उपचार किया जाता है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक स्तर पर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को गांव में ही आईसोलेशन सैंटर की सुविधा दी जा रही है, जिले के अब तक 50 गांवों में करीब 650 बैड के आईसोलेशन सैंटर बनाए गए हैं। इसी प्रकार द्वितीय स्तर पर सीएचसी में 15 से 25 ऑक्सीजन बैड तैयार करवाए गए हैं तथा केसीजीएमसी में केवल अब सीरियस मरीजों को ही दाखिल किया जा रहा है।
उन्होंने एक प्रश्र के उत्तर में बताया कि कोविड-19 की दूसरी लहर में मृत्यु दर काफी बढ़ गई थी जोकि चिंताजनक है। मृत्यु दर बढऩे का कारण मरीजों का समय पर अस्तपाल में पहुंचकर कारोना संक्रमण के लक्षणों के बारे में जानकारी न देना पाया गया है। यदि वे समय पर संबंधित अस्पताल में रिपोर्टिंग करते तो शायद उनका जीवन बचाया जा सकता था। उन्होंने लोगों से अपील की कि जिस भी व्यक्ति में कोरोना के लक्षण दिखाई दें वे तुरंत अस्पताल में रिपोर्ट करें अपना सैंपल दें ताकि कोरोना महामारी को हराया जा सके।
सुमरिन राय


















