बाहुबली से ‘भक्त’ की भूमिका: वाराणसी में बृजेश सिंह ने संभाला जगन्नाथ मंदिर के कायाकल्प का जिम्मा

वाराणसी: काशी की गलियों में कभी अपनी दबंगई के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह अब एक बिल्कुल नए अवतार में नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को असि घाट स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर के पुनर्विकास की आधारशिला रखी गई, जहां बृजेश सिंह का आध्यात्मिक रूप चर्चा का विषय बना रहा। हाथ में डमरू थामे और भक्ति के रंग में रंगे बृजेश सिंह, कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य की मौजूदगी में डमरू बजाते दिखे।
220 साल पुराने मंदिर का होगा भव्य जीर्णोद्धार
असि घाट के पास स्थित यह जगन्नाथ मंदिर 1802 में बनाया गया था, जो समय के साथ अपनी आभा खो रहा था। संसाधनों की कमी और अतिक्रमण की समस्याओं से जूझ रहे इस मंदिर के वैभव को वापस लाने के लिए करीब एक साल पहले बृजेश सिंह को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया था। अब उनके नेतृत्व में मंदिर को एक भव्य ‘जगन्नाथ कॉरिडोर’ के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया गया है।
प्रोजेक्ट की खास बातें:
- शिखर की ऊंचाई: मंदिर के वर्तमान 36 फीट ऊंचे शिखर को बढ़ाकर 108 फीट किया जाएगा।
- बजट और निर्माण: शुरुआती चरण के लिए ट्रस्ट ने 30 करोड़ रुपये का बजट रखा है। राम मंदिर की तर्ज पर इसे जन सहयोग से पूरा किया जाएगा।
- सुविधाएं: परिसर में श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था और ‘काशी अन्नक्षेत्र’ की तर्ज पर नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था होगी।
- समय सीमा: इस पूरे प्रोजेक्ट को आगामी 3 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
शंकराचार्य ने रखी आधारशिला
वैसाख पूर्णिमा (1 मई) के अवसर पर कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती ने विधिवत पूजन के साथ इस कॉरिडोर के निर्माण की नींव रखी। इस दौरान बृजेश सिंह अपनी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह के साथ मौजूद रहे। आधारशिला रखे जाने के वक्त डमरू दल के बीच पहुंचकर बृजेश सिंह ने खुद डमरू बजाकर अपनी आस्था प्रकट की। वाराणसी के लक्खा मेलों में शुमार प्रसिद्ध रथयात्रा इसी मंदिर से शुरू होती है। अब इस पुनर्विकास योजना के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि काशी का यह ऐतिहासिक कोना एक बार फिर अपने पुराने गौरव के साथ जगमगा उठेगा।

















